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डिजिटल क्रांति का करियर पर पड़ने वाला एक बड़ा प्रभाव यह है कि अब मानवीय विशेषज्ञता की मांग का स्वरूप बदल रहा है। ऐसे लोगों को महत्व दिया जा रहा है, जिनमें बौद्धिक जिज्ञासा हो और जो सीखने के लिए तैयार हों। जो अपनी क्षमताओं को तेजी से विकसित कर बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकें। लगातार सीखने को प्रोत्साहित करें
टीम की कार्य-संस्कृति में बदलाव लाने के लिए औपचारिक प्रोत्साहन और पुरस्कार व्यवस्था जरूरी है। जिज्ञासा को बढ़ावा देने का मतलब केवल सीखने और खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करने वाले कर्मचारियों की प्रशंसा या पदोन्नति करना नहीं है। ऐसा माहौल बनाना भी है, जहां आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा मिले और कर्मचारी अपनी राय रखने से न डरें। कमियों को पहचानना भी जरूरी है
आज कई संस्थान कर्मचारियों के विकास के लिए उनकी खूबियों पर ध्यान देते हैं और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में नकारात्मक प्रतिक्रिया के महत्व को भूलना आसान है। जब तक व्यक्ति को अपनी कमियों और सीमाओं का पता नहीं होगा, तब तक वह उनमें सुधार नहीं कर सकता। अपनी क्षमता से संतुष्ट रहना या बिना वजह खुद को बेहतर समझना विकास में बाधा बन सकता है। लीडर सीखेगा, तो टीम भी सीखेगी
लीडर्स का व्यवहार उनकी टीम के व्यवहार और प्रदर्शन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। इसलिए अगर आप अपनी टीम में जिज्ञासा और सीखने की आदत विकसित करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको खुद भी सीखने और बदलाव के लिए तैयार रहना होगा। जो अपेक्षाएं आप अपनी टीम से करते हैं, उन्हें अपने व्यवहार में भी अपनाएं। जब लीडर खुद सवाल पूछता है, नई चीजें सीखता है और अपनी गलतियों से सीखने को तैयार रहता है, तो टीम भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होती है। जिज्ञासु लोगों को काम पर रखें
अगर आप ऐसे लोगों को टीम में शामिल करते हैं, जिनमें स्वाभाविक रूप से सीखने और नई चीजें जानने की जिज्ञासा है, तो उनके सीखने की इच्छा को लेकर आपको ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ेगी। उनकी रुचियों और उनकी भूमिका के बीच सही तालमेल बैठाना भी जरूरी है। इससे वे अपने काम में अधिक रुचि लेंगे और लगातार सीखने के लिए प्रेरित रहेंगे। ऐसे कर्मचारी नई चुनौतियों को सीखने के अवसर के रूप में देखते हैं। इससे टीम में नए विचार आते हैं और काम की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
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