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हर व्यक्ति में कुछ ऐसी आदतें या व्यवहार होते हैं जो उसकी सफलता की राह में बाधा बन सकते हैं। यदि समय रहते इन आदतों पर ध्यान न दिया जाए, तो ये आपकी नेतृत्व क्षमता और प्रभावी ढंग से काम करने की योग्यता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। यहां ऐसी ही 5 सामान्य आदतें और उनसे उबरने के उपाय दिए गए हैं: 1. आवेग में आकर तुरंत निर्णय लेना
आवेग में लिए गए फैसलों में बिना सोचे-समझे भावनात्मक प्रतिक्रिया देना या बिना पूरी जांच-पड़ताल किए ही नए विचारों पर काम शुरू करना शामिल है। अपनी पिछली असफलताओं पर विचार करें और समझें कि जल्दबाजी में आपने क्या अनदेखा कर दिया था। निर्णय लेने से पहले स्वयं से पूछें- इस योजना को लागू करने में सबसे बड़ी कठिनाई क्या आ सकती है? 2. हमेशा दूसरों को दोष देते रहना
ऐसे लोग हर समस्या का कारण हमेशा दूसरों, परिस्थितियों या किस्मत को मानते हैं। वे अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते हैं। वे अपनी गलतियों से सीखने और आगे बढ़ने का अवसर खो देते हैं। कमियों को स्वीकारें, उनसे सीखें और मौजूदा परिस्थितियों को स्वीकारें। यह जानें कि किन बातों पर आपका नियंत्रण है और अपने प्रयास से क्या बदलाव ला सकते हैं। 3. हर काम में पूर्णता की चाह रखना
हर काम को बिल्कुल परफेक्ट बनाने की कोशिश करने वाले लोग अक्सर समय-सीमा और अच्छे अवसर दोनों ही खो देते हैं। इससे बचने के लिए शुरुआत में ही अपेक्षित परिणाम, लागत और समय-सीमा पर स्पष्ट फीडबैक लिया जा सकता है। परियोजना के दौरान अपने वरिष्ठ के साथ बीच-बीच में समीक्षा बैठकें भी रखें और छोटे-छोटे प्रयोग करके यह सीखें कि हर बार पूर्णता जरूरी नहीं होती। 4. शक्ति की अत्यधिक लालसा
शक्ति और अधिकार की अधिक चाह रखने वाले लीडर अक्सर जल्दबाजी में फैसले लेते हैं और अपने सहकर्मियों से दूरी बना लेते हैं। इससे बचने के लिए जवाबदेही की व्यवस्था विकसित करें। भरोसेमंद सलाहकार नियुक्त करें, समय-समय पर अपने काम का मूल्यांकन करवाएं और खुलकर फीडबैक मांगें। हर महत्वपूर्ण निर्णय के साथ उसके समर्थन में ठोस कारण और स्पष्ट कार्ययोजना भी प्रस्तुत करें। 5. हर चीज पर नियंत्रण रखने की जिद
अधिक नियंत्रण रखने वाले लीडर्स के साथ काम करने वाले कर्मचारी अक्सर पहल करना और ईमानदारी से अपनी राय देना बंद कर देते हैं। कई बार नौकरी छोड़ने का फैसला कर लेते हैं। आप हर छोटी बात में दखल देते हैं, तो नियमित अंतराल पर समीक्षा बैठक करें, लक्ष्य और प्रदर्शन के मानक स्पष्ट करें, आवश्यक मार्गदर्शन दें और टीम को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर भी दें।
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