4 घंटे पहले
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किताबों से जानिए, आपके भीतर का आलस और डर की आवाज आखिर क्यों खतरनाक है? डर वर्तमान खतरे की प्रतिक्रिया है, तो चिंता क्या है?
अनुशासन ही सच्ची आजादी का रास्ता है प्रेरणा इंतजार करने से नहीं आ सकती, वह तो केवल काम करने से ही आती है। आपके भीतर का आलस और डर की आवाज हमेशा आपको रोकने की कोशिश करती रहेगी। लेकिन जिस दिन आप बिना मन बनाए भी अपना काम पूरे उत्साह के साथ शुरू कर देते हैं, उसी दिन बदलाव शुरू होता है। काम को शुरू करना सफलता की गारंटी है। अनुशासन ही सच्ची आजादी का रास्ता है। (डु द वर्क -स्टीवन प्रेसफील्ड)
उन्हीं चीजों को महत्व दें जो वास्तव में जरूरी हैं हमारे पास एक जीवन जीने के लिए समय बहुत कम होता है, लेकिन फिर भी हम इस तरह जीते हैं, जैसे सब कुछ बाद में कर लेंगे, जैसे हर चीज हमारे नियंत्रण में है। हर काम को करने की कोशिश हमें अधूरा बना देती है। जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि जीवन सीमित है, तभी हम वास्तव में जरूरी चीजों को महत्व देना सीखते हैं। दरअसल सीमाएं ही जीवन को सही अर्थ देती हैं। (फोर थाउजेंड वीक्स -ऑलिवर बर्कमैन)
सरलता कोई पिछड़ापन नहीं, समझदारी है बड़ा बनने की अंधी दौड़ ने इस दौर में इंसान को भीतर से बहुत ही छोटा कर दिया है। आज सफलता के मायने ही बदल गए हैं। सच्ची प्रगति वह होती है, जो मनुष्य और प्रकृति दोनों का सम्मान करती है। जब काम, जीवन और यहां तक की आपकी सोच भी मानवीय होती है, तभी समाज स्वस्थ बन सकता है। सरलता कोई पिछड़ापन नहीं है, यह तो समझदारी का ही दूसरा रूप है। (स्मॉल इज ब्यूटीफुल -ईएफ शूमाकर)
डर हमेशा ही कमजोरी का प्रतीक नहीं होता डर हमेशा ही कमजोरी का प्रतीक नहीं होता। कई बार वही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा बन जाता है। जब हम अपने अंतर की आवाज सुनते हैं, तो हम सही समय पर सही निर्णय ले पाते हैं। स्वयं पर भरोसा करना भी एक कला है। डर और चिंता में फर्क है। डर वर्तमान खतरे की प्रतिक्रिया है, जबकि चिंता भविष्य की कल्पना। डर उपयोगी है, क्योंकि वह हमें तुरंत कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है। जब हम डर को स्वीकार करते हैं, तो अधिक सजग, सतर्क और आत्मनिर्भर बन जाते हैं। (द गिफ्ट ऑफ फियर -गैविन डी बेकर)








