हरिद्वार में कुंभ 2027 से पहले घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग तेज हो गई है।
उत्तराखंड के हरिद्वार में 2027 में होने वाले कुंभ के दौरान 105 घाटों पर धार्मिक संगठनों ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। श्रीगंगा सभा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हरकी पैड़ी क्षेत्र और 52 घाटों पर गैर-हिन्दुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की
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सबसे हैरान वाली बात ये है कि अभी तक कुंभ क्षेत्र घोषित नहीं हुआ है। ऐसे में ये 105 घाट कौन से हैं ये क्लियर नहीं है। इस पर सीएम ने कहा कि सरकार हर चुनौतियों का अध्ययन कर रही है और उसी के आधार पर आगे कदम उठाएगी।

साध्वी प्राची बोलीं- कुंभ क्षेत्र को अमृत क्षेत्र घोषित करें
इसी बीच आज विश्व हिंदू परिषद की फायर ब्रांड नेता साध्वी प्राची हरिद्वार पहुंची। इस दौरान उन्होंने कहा कि लाल किले पर एक बहुत बड़ी आतंकी घटना घटी, जिसमें पढ़े लिखे डॉक्टर शामिल थे।
उनके पास रासायनिक पदार्थ था, जिसे आप सब जानते हैं, जिससे लाखों लोगों को मौत के घाट उतारा जा सकता है। गंगा मैया में इसे कोई भी डाल सकता है और फिर कितने लोग स्नान करेंगे? करोड़ों लोग आएंगे पूरे विश्व से तो कुछ भी घटना घट सकती है।
इस व्यवस्था को देख करके मेरे मन में आया कि हरकी पैड़ी पर विशेषकर कुंभ के क्षेत्र में इनकी एंट्री अन्य धर्मावलंबियों की टीम में एंट्री बंद होनी चाहिए। गैर हिंदू का प्रवेश सीधे-सीधी भाषा में बताओ गैर हिंदू का प्रवेश वर्जित होना चाहिए। हरिद्वार के अंदर उस क्षेत्र को कुंभ का अमृत क्षेत्र घोषित करना चाहिए और क्योंकि ये हमारे बायलॉज में भी है।
साध्वी प्राची बोलीं- शिक्षा जिहाद पर अच्छा काम किया
इस बात की जानकारी नगर पालिका को भी है। इस बात की कि यह क्षेत्र विशेषकर हिन्दुओं का क्षेत्र है। हिंदुओं के त्योहार, हिंदुओं के स्नान वो बिल्कुल निडरता के साथ होने चाहिए। मैंने क्योंकि धर्म रक्षक धामी जी उत्तराखंड के सीएम साहब है, वो बहुत अच्छा काम कर रही है। धर्म ध्वजा को उन्होंने उठा रखा है।
चाहे अवैध मदरसे का मामला हो। या फिर अवैध मजारों रहे हो या शिक्षा जिहाद इस पर बहुत अच्छा कार्य किया है। तो धर्म रक्षक धामी जी से अनुरोध करती हूं कि जब बायलॉज में है तो आप व्यवस्था बनाइए, आप कर सकते हो। उत्तराखंड की सरकार इस समय कर सकती है और सक्षम भी है।
कुंभ क्षेत्र को अमृत क्षेत्र घोषित किया जाए और उस क्षेत्र में गैर धर्मावलंबियों की एंट्री बंद होनी चाहिए।
सीएम बोले- पवित्रता और धार्मिक पहचान बनी रहे
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस कवायद के पीछे की मंशा साफ करते हुए कहा कि हरिद्वार मां गंगा, ऋषि-मुनियों और संत परंपरा की पवित्र भूमि है। वहां से लगातार मांग उठ रही है कि उसकी पवित्रता और धार्मिक पहचान बनी रहे।
सरकार सभी पहलुओं, पुराने कानूनों, धार्मिक मान्यताओं और व्यावहारिक चुनौतियों का अध्ययन कर रही है और उसी के आधार पर आगे कदम उठाएगी।

श्रीगंगा सभा- 100 साल पहले अंग्रेजों के समय हरिद्वार का विकास हुआ
श्रीगंगा सभा, हरिद्वार के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि लगभग 100 साल पहले, अंग्रेजों के समय जब हरिद्वार का विकास हुआ, तब यहां की व्यवस्थाएं स्थानीय मान्यताओं और समाज की भूमिका के आधार पर तय की गई थीं।
उन्होंने कहा कि यदि उस समय भी ऐसी व्यवस्थाओं की जरूरत महसूस हुई, तो आज के दौर में जब धार्मिक स्थलों और अनुष्ठानों को लेकर विवाद और चुनौतियां सामने आती हैं यह आवश्यकता पहले से ज्यादा महसूस होती है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर कई बार राज्य सरकार और सीएम से बातचीत हुई थी।

श्रीगंगा सभा के अधीन हरिद्वार के 52 घाट हैं।
मांग किसने उठाई? श्री गंगा सभा का प्रस्ताव
इस बहस की जड़ में है श्री गंगा सभा का प्रस्ताव। सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम का कहना है कि कुंभ क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित कर धार्मिक घाटों, अनुष्ठानों और परंपराओं की सुरक्षा की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि जब अंग्रेजी दौर में भी हरिद्वार की पवित्रता बनाए रखने के लिए नियम बनाए गए थे, तो आज करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के दौर में यह जरूरत और बढ़ गई है।
1916 का समझौता और 1935 का अधिनियम
गंगा सभा अपने पक्ष में इतिहास का हवाला देती है कि-
- 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय ने ब्रिटिश सरकार से समझौता कर हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों की पवित्रता के लिए नियम तय कराए।
- 1935 का हरिद्वार म्युनिसिपल अधिनियम इन प्रावधानों को और मजबूत करता है।

श्री गंगा सभा प्रेस कॉन्फ्रेंस करती हुई और सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम जानकारी देते हुए।
कुंभ मेला अधिकारी बोलीं- फैसला नगर निगम कर सकता
कुंभ मेला अधिकारी सोनिका सिंह ने दैनिक भास्कर एप को बताया कि अभी तक कोई ऐसी बात सामने नहीं आई है। ये मांग श्रीगंगा सभा उठा रही है। कुंभ को लेकर नोटिफिकेशन 6 महीने पहले जारी होता है। इसलिए अभी कुंभ क्षेत्र ज्वालापुर (हरिद्वार) से लेकर देवप्रयाग तक है, जो 25 सेक्टर में बांटे है।
अगर ऐसा कोई फैसला होता तो नगर निगम कर सकता है।
1916 का समझौता, और आज की बहस
हरकी पैड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश निषेध का ऐतिहासिक आधार 1916 का समझौता और 1935 का हरिद्वार म्युनिसिपल अधिनियम है। पंडित मदन मोहन मालवीय ने ब्रिटिश सरकार से हरिद्वार नगर पालिका अधिनियम 1916 के तहत घाट क्षेत्र की पवित्रता व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह प्रावधान कराया। यह नियम हर की पौड़ी, कुशावर्त घाट व आसपास के क्षेत्रों पर लागू होता है।
1916 में मदन मोहन मालवीय ने ब्रिटिश अधिकारियों के साथ करार किया, जब हरिद्वार छोटा शहर था। इससे हरकी पैड़ी पर गैर-हिंदू प्रवेश प्रतिबंधित हुआ, जो हरिद्वार नगर निगम कोड में दर्ज है। 1935 के हरिद्वार नगर अधिनियम ने इसे मजबूत किया, पृष्ठ 270 अधिनियम 20 में स्पष्ट उल्लेख है।
इसमें गंगा की अविरल धारा और तीर्थनगरी की पवित्रता बनाए रखने के लिए कई नियम बनाए गए-
- घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित
- नगर क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के रात्रि प्रवास पर रोक
- तीर्थ क्षेत्र में स्थायी तौर पर बसने की मनाही
समय बदला, सरकारें बदलीं और कई नियम ठंडे बस्ते में चले गए। लेकिन अब फिर से इन्हें लागू करने पर चर्चा तेज हो गई है।

श्रीगंगा सभा के दिखाए गए डॉक्यूमेंट।
मुख्य घाट जहां प्रवेश प्रतिबंधित
हरकी पैड़ी: हरिद्वार का सबसे प्रसिद्ध घाट, जहां गैर-हिंदुओं को प्रवेश निषिद्ध है। गंगा आरती और कार्यक्रमों में सख्ती बरती जाती है, जैसा कि हाल के विवादों में देखा गया। कनखल क्षेत्र के घाट: हरिद्वार-कनखल पुलिस स्टेशन क्षेत्र में गैर-हिंदुओं का स्थायी निवास और घाटों पर प्रवेश वर्जित। यह ‘गैर-मुस्लिम क्षेत्र’ के रूप में जाना जाता है।
अन्य घाटों पर स्थिति
ज्वालापुर कोतवाली के अंतर्गत अग्रसेन घाट जैसे कुछ घाटों पर कोई सख्त प्रतिबंध नहीं, लेकिन विवादास्पद वीडियो सामने आते रहते हैं। सभी घाटों पर आस्था से जुड़े नियम लागू होते हैं, जैसे चमड़े का सामान न ले जाना।
गंगा सभा का स्टैंड- नियम नए नहीं, सौ साल पुराने
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम कहते हैं
हरकी पैड़ी और कई घाटों पर गैर-सनातनी के आने की मनाही नई नहीं, बल्कि सौ साल से ज्यादा पुरानी है। हमारी मांग है कि कुंभ क्षेत्र को पवित्र घोषित किया जाए ताकि आस्था और परंपरा सुरक्षित रहे
धामी सरकार क्या सोच रही?
सूत्रों के मुताबिक धामी सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। सीएम धामी कई बार साफ कह चुके हैं
उत्तराखंड के देव-स्वरूप और सनातन सांस्कृतिक पहचान से कोई समझौता नहीं होगा
क्यों बढ़ी हलचल? कुंभ करीब…
हरिद्वार में हर साल करीब 4 करोड़ से ज्यादा तीर्थयात्री पहुंचते हैं। 2027 में अर्धकुंभ, सावन में कांवड़ यात्रा और गंगा कॉरिडोर प्रोजेक्ट इन सबके बीच सरकार चाहती है कि—
- व्यवस्थाएं मजबूत हों
- भीड़ संभले
- और पवित्रता बरकरार रहे
इसी के चलते 105 घाटों का सर्वे कराया गया और पुनर्निर्माण की तैयारी शुरू है।
आगे क्या?
अगर प्रस्ताव मंजूर होता है तो-
- हरिद्वार-ऋषिकेश को “पवित्र नगरी” का दर्जा
- घाटों पर कड़ा नियम
- रात्रि प्रवास और आचरण को लेकर नई गाइडलाइन

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