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दो चर्चित वैज्ञानिक एना मारिया कुएर्वो और जुआन लुइस अरसुगा ने उम्र बढ़ने की प्रक्रिया और उसे बेहतर तरीके से जीने पर विस्तार से बात की है। दोनों की यह बातचीत स्पेन के मशहूर अखबार EL PAÍIS में प्रकाशित हुई। इसे हाल ही में रीडर्स डायजेस्ट ने पुन: प्रकाशित किया है। इस लेख में दोनों वैज्ञानिक इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी हो सकती है? और इसके लिए आज हम क्या कर सकते हैं? पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश.. एंटी एजिंग के लिए सबसे असरदार 3 उपाय – भोजन का सही समय व गैप, पर्याप्त नींद और दिमाग को हमेशा काम देते रहना हम चिम्पैंजी जितनी उम्र जीते थे…, करीब 45 साल। अब करीब 85 साल तक जी रहे हैं। सिर्फ दो मिलियन साल में इतना बदलाव हुआ है। इस पर कुएर्वो तुरंत सवाल बदल देती हैं… ज्यादा साल जीना ही काफी नहीं है। जरूरी है कि वे साल अच्छी सेहत और स्वतंत्रता के साथ बीतें। उम्र बढ़ना जन्म से शुरू हो जाता है। इसमें जीन की भूमिका है, लेकिन खानपान और जीवनभर का पर्यावरण भी असर डालते हैं। कुछ लोग अच्छे जीन की वजह से 100 साल से ज्यादा उम्र तक स्वस्थ रहते हैं। वैज्ञानिक अब यह समझना चाहते हैं कि कौन से जीन व सेलुलर प्रक्रियाएं उन्हें स्वस्थ रखती हैं।. कैलोरी मत गिनते रहिए, खाने का तरीका सुधारिए कुएर्वो के मुताबिक, ऑटोफैजी यानी कोशिकाओं की सफाई सिर्फ कैलोरी कम करने से तय नहीं होती। भोजन के बीच का अंतर, खाने का समय और भोजन का प्रकार भी इसमें भूमिका निभाते हैं। हालांकि, वजन नियंत्रित रखने के लिए कुल कैलोरी और डाइट पर नियंत्रण सबसे जरूरी है। एक्सरसाइज फायदेमंद है, लेकिन अकेले इससे ज्यादा वजन कम करना मुश्किल हो सकता है। खाने का समय भी शरीर पर असर डालता है। सर्केडियन रिद्म यानी जैविक घड़ी यह तय करने में मदद करती है कि शरीर भोजन और उपवास पर कैसे प्रतिक्रिया देगा। कुएर्वो के अनुसार, कुछ लोगों के लिए 8/16 फास्टिंग (दिन के 8 घंटे भोजन करना और बाकी के 16 घंटे कुछ न खाना) उपयोगी हो सकती है। लेकिन सब पर यह नियम लागू नहीं होता। दिमाग को काम देते रहिए, वरना आप उसे खो देंगे उम्र बढ़ने के साथ दिमाग को सक्रिय रखना जरूरी है। कुएर्वो कहते हैं ‘दिमाग का इस्तेमाल करें, वरना उसे खो देंगे।’ सामाजिक संपर्क और नई चीजों से जुड़ाव दिमाग को सक्रिय रखते हैं। इस विषय में कुएर्वो नींद को जरूरी बताती हैं। नींद को लेकर कहती है-‘नींद मुफ्त है, फिर भी कोई पर्याप्त नहीं सोता।’ यानी उम्र को बेहतर तरीके से जीने के लिए आसान चीजों में से एक हमारे पास पहले से मौजूद है।
एंटी एजिंग दुनिया के दो मशहूर वैज्ञानिकों एना मारिया कुएर्वो और जुआन लुइस अरसुगा की बातचीत पर आधारित नींद को लग्जरी नहीं, जरूरत मानिए अरसुगा बताते हैं कि जीवन प्रत्याशा बढ़ने के बावजूद कुछ देशों में अब यह घट रही है। उनके मुताबिक मोटापा और खराब खानपान बड़ी वजह हैं। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के बावजूद खराब जीवनशैली की भरपाई करना मुश्किल हो रहा है। लंबी उम्र के पीछे मत भागिए, क्वालिटी उम्र के लिए मेहनत कीजिए दोनों वैज्ञानिक मानते हैं- एंटी-एजिंग दवा अभी दूर है। मेटफॉर्मिन, अकार्बोज और रैपामाइसिन जैसी दवाओं पर अध्ययन चल रहे हैं। लेकिन इंसानों की उम्र बढ़ाने के लिए अभी कोई दवा स्वीकृत नहीं है। एना मारिया कुएर्वो- स्पेनिश बायोलॉजिस्ट और डॉक्टर। न्यूयॉर्क के Albert Einstein College of Medicine में प्रोफेसर व इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग रिसर्च की को-डायरेक्टर। उम्र बढ़ने में कोशिकाओं की ‘ऑटोफैजी’ पर शोध करती हैं। जुआन लुइस अरसुगा – स्पेनिश पेलियोएंथ्रोपोलॉजिस्ट और Universidad Complutense de Madrid में प्रोफेसर। मानव विकास और जीवाश्मों के विशेषज्ञ व अटापुएर्का पुरातात्विक परियोजना के को-डायरेक्टर हैं।
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