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हार्वर्ड में एप्लाइड मैथमेटिक्स के 19 वर्षीय छात्र रयान जियांग के लिए बीते वीकेंड की रात किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थी। मौका था हार्वर्ड बॉक्सिंग क्लब में ‘फाइट नाइट’ का। वैसे तो हार्वर्ड बॉक्सिंग क्लब में आम दिनों की ट्रेनिंग के दौरान चेहरे पर मुक्का मारना बैन है, लेकिन उस दिन नियम बदल गए। औपचारिकता खत्म हो चुकी थी और असली जंग शुरू हो गई थी। मुक्केबाज अब सिर्फ पैंतरे नहीं दिखा रहे थे, बल्कि जैब, हुक और अपरकट (बॉक्सिंग के मूव) से एक-दूसरे पर कड़ा प्रहार कर रहे थे। दशकों तक हार्वर्ड के छात्र रातों में जटिल समीकरण हल करने या इतिहास की मोटी किताबों में डूबे रहने के लिए जाने जाते रहे हैं। पर अब वे ‘लाइब्रेरी वाली इमेज’ छोड़कर पसीने से लथपथ होकर रिंग में मुक्के बरसाते दिखते हैं। ये छात्र भविष्य के सीईओ बनने के गुर सीखने के साथ-साथ मुक्केबाजी भी पसंद कर रहे हैं। हार्वर्ड, बैब्सन व ब्रैंडिस जैसे संस्थानों में बॉक्सिंग ‘कल्चरल ट्रेंड’ बन चुका है। युवा अधिकांश समय स्क्रीन पर बिताते हैं। ऐसे में बॉक्सिंग उन्हें ऐसी वास्तविकता से जोड़ती है जिसे न तो ‘म्यूट’ किया जा सकता है और न ही ‘स्वाइप’। छात्रा मुस्कान संधू कहती हैं,‘मुक्के खाना किसी को पसंद नहीं, पर यह जानकर अच्छा लगा कि मैं चोट सह सकती हूं। महसूस होता है कि मैं जिंदगी में कुछ भी कर सकती हूं।’ हार्वर्ड बॉक्सिंग का इतिहास काफी पुराना है। थियोडोर रूजवेल्ट व जॉन एफ केनेडी भी यहां बॉक्सिंग कर चुके हैं। कोरोना के बाद क्लब खाली था, पर दानदाता मारियो फ्रेच व कोच जो लेक ने इसमें नई जान फूंक दी है। 68 वर्षीय लेक ने हादसे में अंगुली खो दी, पर मुक्केबाजी का जुनून बरकरार है। वे बताते हैं कि रिंग में हाथ नीचे करना बड़ी गलती है। वे कहते हैं,‘किताबों में जो नहीं लिखा, छात्र यहां सीखते हैं।’ छात्र जियांग का सामना आक्रामक ब्रेजास से था। शुरुआत में ब्रेजास ने दमदार प्रहार किए। पर जियांग ने हार नहीं मानी। अपने पैंतरों से ब्रेजास को हरा दिया। हार्वर्ड के इस ‘मैथ जीनियस’ ने साबित कर दिया कि दिमाग व तकनीक के सही तालमेल से रिंग की जंग भी जीत सकते हैं। यह बदलाव दिखाता है कि फ्यूचर लीडर्स दिमाग से ही नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति व शारीरिक साहस से भी दुनिया का सामना करने को तैयार हैं। बॉक्सिंग क्लब में 300% बढ़ी सदस्यता, नए सदस्यों में 45% छात्राएं कैंपस में बॉक्सिंग का जुनून तेजी से बढ़ रहा है। बीते 4 सेमेस्टर में हार्वर्ड के एमेच्योर बॉक्सिंग क्लब की सदस्यता में 300% की वृद्धि हुई है। नए सदस्यों में 45% छात्राएं हैं, जो खेल की पुरानी छवि बदल रही हैं। खेल मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि बॉक्सिंग से छात्रों की घबराहट व चिंता में 40% की कमी दिखी है। पहले चोट के डर से यूनिवर्सिटी प्रशासन संशय में था, अब इसके फायदे स्वीकार कर रहा है। यह छात्रों को अनुशासन, विनम्रता व विफलताओं के बाद दोबारा खड़े होना सिखाती है।
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