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13 घंटे पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु
भारी बारिश से देश के तटीय शहरों में हालात खराब हैं। मंगलवार रात को देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में भी भारी बारिश के कारण जनजीवन लगभग ठप हो गया। शहर की सड़कों पर पानी भर गया, जिससे हाईवे जाम हो गए और लोग घुटनों तक पानी में चलते नजर आए।
ट्रेनें धीमी गति से चल रही थीं और सबवे बंद कर दिए गए थे। मई महीने में इस तरह की भारी बारिश जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकती है। भारत की सिलिकॉन सिटी बेंगलुरु, जो कि सबसे ज्यादा टेक आबादी होने पर गर्व करती है, वहां कई टेक कंपनियों और मल्टीनेशनल कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से वर्क-फ्रॉम-होम का विकल्प दिया।
तमिलनाडु के सलेम में मेट्टूर बांध का जलस्तर सोमवार को 6,233 क्यूसेक से बढ़कर मंगलवार को 9,683 क्यूबिक फीड प्रति सेकंड (क्यूसेक) हो गया, जिससे इसका जल भंडारण स्तर 109 फुट तक पहुंच गया, जबकि इसकी कुल क्षमता 120 फुट ही है।
याद रखिए, यह गर्मियों का समय है और बारिश के महीने अभी आने बाकी हैं। तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच अंतरराज्यीय यातायात मंगलवार रात तक भारी बारिश के कारण प्रभावित रहा। दूसरी ओर, गोवा में भी मानसून के आगमन से पहले ही भारी बारिश ने न सिर्फ सामान्य जीवन को बाधित कर दिया और पर्यटन व्यवसाय पर भी असर डाला। अग्निशमन और आपातकालीन विभाग के लोग पूरे दिन सतर्कता पर हैं। लेकिन इसका सबसे बुरा प्रभाव इस रूप में पड़ा है कि कई प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हुए हैं और प्री-मॉनसून काम भी समय पर पूरा नहीं हो सका है।
ये साल आम के लिए एक उत्पादक सीजन माना जा रहा था, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण पैदावार में अच्छी-खासी कमी आई है। पहले तो भारी बारिश के कारण फूल आने में देरी हुई। वहीं पिछले वर्षों की तुलना में तापमान में उतार-चढ़ाव और अचानक बारिश ने भी आम के उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
दूसरी ओर, फरवरी से अप्रैल के बीच तापमान में असामान्य वृद्धि और मिट्टी में नमी बढ़ने से फलों में कीट संक्रमण बढ़ गया है। यही कारण है कि बाजार में स्वादिष्ट और अच्छे आम चुनना हममें से ज्यादातर लोगों के लिए अब चुनौतीपूर्ण हो गया है। बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम ने आम के व्यवसाय पर निर्भर किसानों की आय को प्रभावित किया है।
दूसरी ओर, चेन्नई में अस्पतालों ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण ट्रांसप्लांट, बायपास सर्जरी और हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट जैसी महत्वपूर्ण सर्जरी रद्द कर दी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुखार के ताजा मामलों को कोविड-19 के केस मान लिया है, जबकि दो सप्ताह पहले से फैल रही इस बीमारी का मुख्य कारण इन्फ्लुएंजा बताया जा रहा था।
स्वास्थ्य अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि स्थानीय वायरल स्ट्रेन सिंगापुर और हांगकांग के ओमिक्रॉन जेएन.1 का ही है या नहीं। पुडुचेरी में कोविड-19 के 12 मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र के पुणे में कोविड मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नायडू अस्पताल में 50 बिस्तर आरक्षित किए गए हैं।
सिंगापुर और हांगकांग में मामले बढ़े हैं और पिछले सप्ताह 14 हजार से अधिक कोविड के केस दर्ज किए गए। हांगकांग का मानना है कि कोविड अब एक ‘आवधिक पैटर्न वाली स्थानिक बीमारी’ बन गई है। भारत में भी इस सोमवार को एक समीक्षा बैठक हुई। 19 मई तक भारत में कोविड मामलों की संख्या 257 थी, हालांकि देश की जनसंख्या के हिसाब से ये बहुत कम है।
हालांकि डॉक्टर्स इन सब मामलों को मामूली बता रहे हैं। पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय उभरती परिस्थितियों को लेकर सतर्क व सक्रिय है। अप्रत्याशित बारिश, कृषि पर इसका प्रभाव और कोविड केस की बढ़ती संख्या को देखते हुए बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तियों को कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करने की सलाह दी जाती है। हाथों की स्वच्छता बनाए रखें, मास्क पहनें और भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचें।
फंडा यह है कि अस्पताल में भर्ती होने का खर्च आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रहा है तो खुद को बचाकर रखना ही स्वस्थ जीवन जीने का सबसे विवेकशील रास्ता है। आर्थिक रूप से भी यही सही है।








