एन. रघुरामन का कॉलम:  छोटी-छोटी लतें नहीं रोकीं तो वे बड़ी समस्या बन सकती हैं
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: छोटी-छोटी लतें नहीं रोकीं तो वे बड़ी समस्या बन सकती हैं

Spread the love




मेरी भी कुछ छोटी लतें हैं। एक है ‘रिटर स्पोर्ट हेजलनट चॉकलेट’। यकीन मानिए कि 100 ग्राम के इस पैक को मैं हर लंच और डिनर के बाद चार हिस्सों में बांटकर महज दो दिनों में चट कर सकता हूं। हर विदेश यात्रा पर मैं पर्याप्त मात्रा में ये लेता हूं। बाहर से आने वाला हर कोई मेरी यह कमजोरी जानता है, मुझे कुछ बताने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन यह छोटी-सी लत धीरे-धीरे स्वास्थ्य समस्या बन गई और मुझे डॉक्टर के पास जाना पड़ा। आज भी मेरे फ्रिज में ‘रिटर स्पोर्ट’ हैं, लेकिन खत्म नहीं होती। मैं इस लत से छुटकारा पा चुका हूं। हाल ही में मैंने कैथरीन ग्रे की किताब ‘लिटिल एडिक्शंस : फ्रीडम फ्रॉम अवर टाइनी बट माइटी कंपल्शंस’ पढ़ी। वह कहती हैं कि ज्यादातर लोग मानते हैं स्मोकिंग, वेपिंग, गैम्बलिंग और पोर्न देखना ही लत है। लेकिन कुछ कम नुकसानदायक चीजें भी हैं, जो जीवन की गुणवत्ता खराब कर सकती हैं। मसलन, टीवी देखना, बोर होने पर शॉपिंग करना, जंक फूड खाना और आइसक्रीम की चाहत (जो मुझे भी है, लेकिन मैं दूसरी कोई मिठाई नहीं खाता)। ये चीजें लाइफस्टाइल को व्यापक तौर पर प्रभावित करती हैं। वे एक पावर पॉइंट प्रेजेन्टेशन सरीखी इन लतों की बढ़ने की प्रक्रिया बताती हैं। 1. मजा, 2. मजा + समस्या, 3. समस्या + मजा, 4. समस्या। कोई आदत तयशुदा इस्तेमाल से ज्यादा होने लगे तो इसी जगह वह लत बन जाती है। उन्होंने ऐसी कई चीजों के बारे में लिखा, लेकिन मैं तीन लतों के बारे में बता रहा हूं, जो ज्यादातर लोगों में होती हैं। 1. बिंज वॉचिंग : कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में लोगों को ‘बॉटमलेस बाउल’ में सूप दिया गया। यह ऐसा बाउल था, जिसमें सूप अपने आप भर जाता था। तब लोगों ने सामान्य की तुलना में 73% ज्यादा सूप पी लिया। इसी तरह टीवी कॉन्टेंट प्रोड्यूसर सीजन के पूरे एपिसोड एक साथ देते हैं और हम एक ही रात में इन्हें बिंज वॉच करते हैं। इसे कैसे ठीक करें? यह तय करें कि जिंदगी के कितने साल आप टीवी देखना चाहते हैं? 365 दिन तक रोज 54 मिनट देखने का मतलब हुआ 19,710 मिनट- यानी एक वर्ष में 329 घंटे। बहुत ज्यादा टीवी देखने का अर्थ है कि आप उनमें से हैं, जो तत्काल तृप्ति चाहते हैं। इसकी बजाय धीमे डोपामाइन वाली चीजें तलाशें, जैसे- पढ़ना, खाना बनाना, लोगों से मिलना या एक्सरसाइज। 2. शॉपिंग : मैं एम. वेंकटरमन को जानता हूं, जो डीएनए अखबार में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर थे। वे परेशान होते तो शॉपिंग पर निकल जाते। तब मैं नहीं जानता था कि ये भी लत हो सकती है। ग्रे बताती हैं कि क्यों लोग जरूरत से ज्यादा शॉपिंग करते हैं? वे कहती हैं कि एक अध्ययन के मुताबिक इसका कारण इनमें से एक होता है- सुख की तलाश, दर्द से बचने की कोशिश, सजावट के जरिए प्रभाव दिखाना, सुंदरता के जरिए रोमांटिक स्वीकार्यता पाना और संसाधनों को जमा करना। अब इसे कैसे रोकें? दिमाग का एक हिस्सा ‘इंसुला’ हमें शॉपिंग से रोकता है। यह नकारात्मक उत्तेजना, घृणा और नुकसान से बचने की भावना पैदा करता है। जब हम क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं तो यह सक्रिय नहीं होता। लेकिन कैश भुगतान के वक्त ‘पेन ऑफ पेमेंट’ एक्टिवेट होता है, जो हमें कम खरीदारी के लिए प्रेरित करता है। 3. लोगों को खुश करना : कई लोग दूसरों की परेशानी कम करने के लिए भारी वजन उठाने जैसा काम करते हैं। रविवार को मैंने व्यक्तिगत तौर पर यह महसूस किया, जब मैंने उस मरीज को पलटा, जिसे देखने बीते एक हफ्ते से अस्पताल जा रहा था। मेरी पीठ में तेज दर्द हो गया। किसी टकराव को टालने के लिए दूसरों के मूड पर जरूरत से ज्यादा निगरानी रखना अंग्रेजी में ‘फॉन’ कहलाता है। यह उन लोगों में ज्यादा दिखता है, जिनका बचपन मुश्किलों में बीता हो। इसे ठीक करने के लिए सीमाएं तय करें। अगर कोई गुस्से में या परेशान दिखे तो सोचें कि ‘उन्हें ऐसा ही रहने दो’ और वहां से हट जाएं। जब ‘हां’ कहना चाहें, तब ‘ना’ कहना भी एक तरीका है। फंडा यह है कि यदि आप छोटी-छोटी लतों को समय रहते नहीं रोकेंगे तो धीरे-धीरे वे बड़ी समस्या बन सकती हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *