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- Why Good Design Matters In Technical Inventions | N Raghuraman Column
1 घंटे पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु
हर बार जब मैं अपने घर में किसी को टॉयलेट साफ करते देखता हूं तो मन ही मन उस व्यक्ति की तारीफ करता हूं, जिसने टॉयलेट क्लीनर की प्लास्टिक की बोतल का डिजाइन बनाया। इसकी मुड़ी गर्दन और पतली नोजल यूजर को किनारों के नीचे और मुश्किल कोनों तक पहुंचने में मदद करती है। इससे छींटे भी कम उड़ते हैं और लिक्विड सही से डाला जा सकता है।
इस तरह का साधारण डिजाइन एक अरुचिकर काम को भी आसान बना देता है। इस मामले में तकनीकी आविष्कार भी कोई अपवाद नहीं हैं। हाल ही में टोरंटो की यात्रा के दौरान मेरी पत्नी को मेरी एक समस्या के तकनीकी समाधान के बारे में पता चला। मुझे ‘एसेंशियल ट्रेमर’ नाम की हल्की न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें शरीर का कोई हिस्सा अनैच्छिक और लयबद्ध रूप से कांपने लगता है।
मैं जब चाय का कप या गर्म पानी का गिलास जैसी हल्की चीजें उठाता हूं तो इसका असर मेरे बाएं हाथ पर होता है। कुछ ग्लोबल स्टडीज बताती हैं कि दुनियाभर में 60 साल से अधिक उम्र के करीब 5% लोग एसेंशियल ट्रेमर से प्रभावित होते हैं। यह आम मूवमेंट डिसऑर्डर है, जो किसी भी उम्र में हो सकता है। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ इसकी आशंका बढ़ जाती है।
मेरी पत्नी ने मुझे ‘स्टेडीवियर’ द्वारा विकसित एक वियरेबल डिवाइस दिखाई, जो हाथ के कम्पन को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसका आइडिया मार्क एलियास के मन में आया था, जो टोरंटो यूनिवर्सिटी से पढ़े स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं। अपनी दादी को एसेंशियल ट्रेमर से जूझते देख उन्होंने सोचा कि क्या भूकंप के दौरान ऊंची इमारतों के कंपन नियंत्रित करने में इस्तेमाल होने वाले सिद्धांतों से इंसानी हाथों को भी स्थिर रखा जा सकता है?
अपने दोस्त एमिल मामरी के साथ मिलकर एलियास ने ऐसा वियरेबल डिवाइस बनाया, जिसमें कम्पन कम करने के लिए मैकेनिकल डैम्पिंग का इस्तेमाल होता है। इसका मकसद था कि पानी पीने, लिखने और अपने शौक पूरे करने जैसे रोजमर्रा के कामों को आत्मविश्वास से करने में लोगों की मदद हो। कंपनी का कहना है कि उसके डिवाइस से सैकड़ों यूजर्स को मदद मिली है, हालांकि हर व्यक्ति के लिए इसका फायदा अलग-अलग हो सकता है।
एलियास ने कहा कि ‘हमने ऐसे लोगों को देखा है, जिन्हें अपने मूवमेंट्स पर फिर से भरोसा होने के बाद वे दोबारा गिलास से पानी पीने और ड्रॉइंग जैसी हाॅबी पूरी करने लगे हैं।’ मैंने अपनी पत्नी से कहा कि अगली बार जब हम दोनों टोरंटो जाएंगे तो मैं यह डिवाइस खरीद लूंगा। लेकिन कोई चीज मुझे रोक रही थी- इसका डिजाइन। मैं इसके लुक और इस बात को लेकर पूरी तरह कम्फर्टेबल नहीं था कि पहनने के बाद यह मेरे हाथ पर सबको दिखाई देगा।
जब कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि वे अपडेटेड वर्शन पर काम कर रहे हैं, जिसमें इसके ज्यादातर हिस्से बांह पर होंगे और चाहें तो उन्हें शर्ट की स्लीव्स के नीचे छिपाया जा सकेगा। तब मैंने इंतजार करने का फैसला किया। इस फैसले से उस तकनीक या उसे बनाने वाले लोगों के प्रति मेरी प्रशंसा कम नहीं होती। बल्कि मेरी धारणा और मजबूत होती है कि किसी शानदार आविष्कार को भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनने के लिए अच्छे डिजाइन की जरूरत होती है।
कोई डिवाइस पूरी तरह सही काम कर सकता है, लेकिन उसे यूज करते हुए लोगों को भी कम्फर्टेबल महसूस होना चाहिए। एक और आम उदाहरण अलार्म क्लॉक का है। हॉरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ न्यूयॉर्क के अनुसार 1904 में आई वेस्टक्लॉक्स अल्टरनेटिंग अलार्म घड़ी 20 सेकंड तक बजती, फिर 20 मिनट पॉज्ड रहती और फिर से बजने लगती थी।
यह सिलसिला तब तक चलता, जब तक कोई उसे स्टॉप नहीं करता। इससे पहले की घड़ियों में अलार्म बंद करने के लिए स्विच, लीवर या नॉब होते थे। 1950 और 1960 के दशक में आधुनिक स्नूज बटन आया, जिसकी मदद से एक बटन दबाकर जागने को कुछ मिनट और टाला जा सकता था। यह तकनीक महज घड़ी को रिंग करने के लिए नहीं थी। अच्छे डिजाइन ने घड़ी का इस्तेमाल आसान बना दिया, खासकर जब कोई अंधेरे में अलार्म बंद करने का बटन टटोल रहा हो।
फंडा यह है कि हर अच्छे आविष्कार में डिजाइन पर ध्यान देना जरूरी है, फिर चाहे वह तकनीकी हो या कोई और। अच्छे डिजाइन का मतलब अनिवार्य तौर पर यह नहीं कि कोई चीज दिखने में असाधारण हो। इसका मतलब है कि वह आमजन की जिंदगी को आसान, सुरक्षित और बेहतर बनाए।







