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दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक में काम करने वाले मेरे दोस्त ने इस हफ्ते के बीच दोपहर करीब 12 बजे मुझे फोन किया। मैं हैरान था, क्योंकि जहां वह काम करता है, वहां रात के 2.30 बज रहे थे। उसने पहले मुझे परेशान करने के लिए माफी मांगी और फिर बताया कि इस सोमवार को उसे ले-ऑफ नोटिस मिला है। पिछले दो दिनों से वह अपने परिवार को इसे समझाने की कोशिश कर रहा था। यह भी सोच रहा था कि सोसायटी या दोस्त जब काम के बारे में पूछेंगे तो क्या जवाब देगा। उसकी एंग्जायटी बढ़ती जा रही थी, क्योंकि इस महीने के अंत तक उसकी जॉब चली जाएगी। इतने महीनों से मिल रही सैलरी से ही वह ईएमआई, बच्चों की स्कूल फीस, पैरेंट्स के मेडिकल बिल चुकाता और अपने सपने बुनता रहा था। लेकिन अब सब कुछ अनिश्चित हो गया है। कोई दुनिया की सबसे अच्छी कंपनियों में से एक में काम कर सकता है- ऐसी कंपनी, जिसकी परफॉर्मेंस, प्रोफिटिबिलिटी और ग्लोबल रीच की तारीफ होती है- और फिर भी वह नौकरी से निकाले जाने की जोखिम झेल रहा है। नेटफ्लिक्स का उदाहरण ही लीजिए। सब्स्क्राइबर्स के मामले में यह अब भी सबसे अग्रणी है। यह दुनिया की प्रमुख एंटरटेनमेंट और स्ट्रीमिंग कंपनियों में शुमार है। इतनी सफलता के बावजूद कंपनी ने इस सोमवार करीब एक हजार जॉब्स की छंटनी का फैसला किया। इससे मिलने वाला सबक असहज, लेकिन अहम है। किसी कंपनी की सफलता उसके कर्मचारियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। कारोबार की प्राथमिकताएं रातों-रात बदल सकती हैं और किसी कर्मचारी को यह नहीं मानना चाहिए कि किसी मशहूर ब्रांड में काम करने से उसका भविष्य स्वत: सुरक्षित हो जाएगा। इसे छंटनी के मंडराते खतरे का दौर कह सकते हैं। नाइकी, स्टारबक्स, मेटा प्लेटफॉर्म्स और अमेरिका की सबसे बड़ी सुपरमार्केट कंपनी क्रूगर तक भी जॉब्स घटा रही है। कुछ कंपनियों में बड़े अधिकारी अपने निवेशकों को संकेत दे रहे हैं कि वे ‘राइट-साइजिंग’ को लेकर गंभीर हैं। वहीं, वर्कर्स को परोक्ष तौर पर कहा जा रहा है कि ‘कृपया वे भी तैयार रहें।’ ऐसे में किसी कर्मचारी के लिए समझदारी भरी प्रतिक्रिया यह होनी चाहिए कि वह न तो घबराए और न आंखें मूंदकर आशावादी बना रहे। मायने यह रखता है कि कोई कर्मचारी कितना तैयार रहता है। कोई परेशानी आने से पहले तैयारी करने के कुछ तरीके यहां पेश हैं। इनमें से आप कुछेक भी अपनाते हैं तो जॉब जाने जैसी स्थिति में सदमा लगने पर कोई रणनीति बनाने के बजाय आपके पास कम से कम एक स्टार्टिंग पॉइंट तो होगा। 1. अफवाहों में आए बिना संकेतों को समझें : भर्ती पर रोक, बार-बार होने वाले री-ऑर्गेनाइजेशन, रद्द होते प्रोजेक्ट, घटते बजट, डुप्लीकेट रोल्स और बदलती बिजनेस स्ट्रैटेजी पर ध्यान दें। इनमें से कोई भी साबित नहीं करता कि छंटनी होने वाली है। लेकिन कई संकेत एक साथ दिखें तो बैकअप प्लान बनाना उचित होगा। अपनी टीम की प्राथमिकताओं के बारे में सही सवाल पूछें और अपना योगदान बताएं। ऑफिस गॉसिप को प्रमाण न बनने दें। 2. जरूरत से पहले ही प्लान-बी तैयार रखें : यह हमेशा बेहतर होता है कि आप पहले से ऐसे एम्प्लॉयर्स, इंडस्ट्री और रोल्स की पहचान कर लें, जहां हमारी स्किल काम आ सकती है। पुराने सहकर्मियों से बात करें, जहां उचित हो फ्रीलांस या कंसल्टिंग अपॉर्च्युनिटीज को एक्सप्लोर करें। नोटिस पीरियड, सेवा समाप्ति की शर्तें, इन्श्योरेंस और नौकरी से जुड़े दूसरे लाभों की जानकारी रखें। 3. ऐसी चीजें सीखें, जिनका बाजार में पैसा मिलता है : सिर्फ उन्हीं स्किल्स पर निर्भर न रहें, जिनसे आपको मौजूदा नौकरी मिली थी। यह समझें कि ऑटोमेशन, एआई और ग्राहकों की बदलती जरूरतें आपकी इंडस्ट्री को कैसे बदल रही हैं। अन्य संबंधित स्किल्स सीखें, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी बढ़ाएं और यह दिखाएं कि आप अडाप्ट कर सकते हैं। सीनियरटी और लॉयल्टी मायने रखते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी यह गारंटी नहीं देता कि आपकी भूमिका अनिवार्य बनी रहेगी। 4. अपनी प्रोफेशनल वैल्यू दिखाते रहें : जरूरत पड़ने से पहले ही अपना सीवी, लिंक्डइन प्रोफाइल और पोर्टफोलियो अपडेट कर लें। अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों, पूरे किए प्रोजेक्ट्स, बढ़ाए गए राजस्व, बचाई गई लागत और हल की गई समस्याओं का रिकॉर्ड रखें। अपनी मौजूदा टीम से बाहर भी प्रोफेशनल रिलेशन बनाए रखें। नेटवर्किंग का मतलब नौकरी मांगना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने से पहले ही अच्छे रिश्ते बनाना है। फंडा यह है कि नेटफ्लिक्स का उदाहरण याद दिलाता है कि कॉर्पोरेट सक्सेस अपने-आप में किसी कर्मचारी की जॉब सिक्योरिटी की गारंटी नहीं। अगर आप एम्प्लॉयी हैं तो हमेशा अपनी जेब में प्लान-बी लेकर चलें।
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