एपल भारत में ही बनाएगी आईफोन:  दावा- कंपनी अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव में नहीं आएगी, ट्रम्प ने धमकी दी थी- अमेरिका में बनें फोन
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एपल भारत में ही बनाएगी आईफोन: दावा- कंपनी अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव में नहीं आएगी, ट्रम्प ने धमकी दी थी- अमेरिका में बनें फोन

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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकी के बाद भी एपल भारत में ही आईफोन बनाएगा। CNN की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में आईफोन के प्रोडक्ट्स से कंपनी को काफी फायदा होगा। इसीलिए कंपनी किसी राजनीतिक दबाव में कोई फैसला नहीं लेगी।

मामले से जुड़े एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने बताया कि, उन्हें पूरा विश्वास है कि एपल ट्रम्प प्रशासन के किसी भी दबाव के बावजूद कंपनी मुनाफे को तब्ज्जो देगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी भारत में उपलब्ध टेलेंट और यहां बिजनेस के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर ज्यादा फोकस कर रही है।

ट्रम्प ने एपल पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी

डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका में बेचे जाने वाले आईफोन की मैन्युफैक्चरिंग भारत या किसी अन्य देश में नहीं, बल्कि अमेरिका में ही होना चाहिए। उन्होंने एपल के CEO टिम कुक को बता दिया है कि यदि एपल अमेरिका में आईफोन नहीं बनाएगा तो कंपनी पर कम से कम 25% का टैरिफ लगाया जाएगा।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर एपल को 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी है।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर एपल को 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी है।

अभी भारत में बन रहे 15% आईफोन फिलहाल एपल अमेरिका में स्मार्टफोन नहीं बनाती है। इसके ज्यादा तक आईफोन चीन में बनाए जाते हैं, जबकि भारत में अब एपल के कुल उत्पादन का लगभग 15% हिस्सा बनता है, जो सालाना लगभग 40 मिलियन यूनिट है।

वहीं एपल के CEO टिम कुक ने हाल ही दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि अमेरिकी बाजार में बिकने वाले 50% आईफोन भारत में बन रहे हैं। कुक ने कहा कि भारत अप्रैल-जून तिमाही में अमेरिका में बिकने वाले आईफोन्स का कंट्री ऑफ ओरिजिन बन जाएगा। उन्होंने बताया कि एयरपॉड्स, एपल वॉच जैसे अन्य प्रोडक्ट्स भी ज्यादातर वियतनाम में बनाए जा रहे हैं।

एपल का भारत पर इतना ज्यादा फोकस क्यों, 5 पॉइंट्स

  • सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन: एपल चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, ट्रेड डिस्प्यूट और कोविड-19 लॉकडाउन जैसे दिक्कतों से कंपनी को लगा कि किसी एक क्षेत्र में ज्यादा निर्भर रहना ठीक नहीं है। इस लिहाज से एपल के लिए भारत एक कम जोखिम वाला ऑप्शन साबित हो रहा है।
  • गवर्नमेंट इंसेंटिव: भारत की मेक इन इंडिया इनिशिएटिव और प्रोडक्शन लिंक्ड इनिशिएटिव (PLI) स्कीम्स कंपनियों को लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता देती हैं। इन पॉलिसीज ने फॉक्सकॉन और टाटा जैसे एपल के पार्टनर्स को भारत में ज्यादा निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
  • बढ़ती बाजार संभावना: भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते स्मार्टफोन मार्केट में से एक है। लोकल प्रोडक्शन से एपल को इस मांग को पूरा करने में ज्यादा मदद मिलती है, साथ ही इसकी बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ जाती है, जो फिलहाल लगभग 6-7% है।
  • एक्सपोर्ट के लिए अवसर: एपल इंडिया में बने अपने 70% आईफोन को एक्सपोर्ट करता है, जिससे चीन की तुलना में भारत के कम इम्पोर्ट टैरिफ का फायदा मिलता है। 2024 में भारत से आइफोन एक्सपोर्ट 12.8 बिलियन डॉलर (करीब ₹1,09,655 करोड़) तक पहुंच गया। आने वाले समय में इसके और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है।
  • स्किल्ड वर्कफोर्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर: भारत का लेबर फोर्स एक्सपीरियंस के मामले में चीन से पीछे है, लेकिन अभी इसमें काफी सुधार हो रहा है। एपल के फॉक्सकॉन जैसे पार्टनर, प्रोडक्शन की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं और कर्नाटक में 2.7 बिलियन डॉलर (₹23,139 करोड़) के प्लांट जैसी फैसिलिटीज का विस्तार कर रहे हैं।

ट्रम्प नहीं चाहते कि एपल के प्रोडक्ट भारत में बनें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नहीं चाहते कि एपल के प्रोडक्ट भारत में बने। पिछले हफ्ते ट्रम्प ने कंपनी के CEO टिम कुक से कहा था कि भारत में फैक्ट्रियां लगाने की जरूरत नहीं है। इंडिया अपना ख्याल खुद रख सकता है।

एपल CEO के साथ हुई इस बातचीत की जानकारी ट्रम्प ने गुरुवार (15 मई) को कतर की राजधानी दोहा में बिजनेस लीडर्स के साथ कार्यक्रम में दी। उन्होंने कहा था कि एपल को अब अमेरिका में प्रोडक्शन बढ़ाना होगा।

इसके बावजूद एपल की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर फॉक्सकॉन ने भारत में 1.49 बिलियन डॉलर (करीब ₹12,700 करोड़) का निवेश किया है। फॉक्सकॉन ने अपने सिंगापुर यूनिट के जरिए बीते 5 दिन में तमिलनाडु के युजहान टेक्नोलॉजी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड में यह निवेश किया है।

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