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जून की भीषण गर्मी से न्यूयॉर्क की सड़कें तप रही थीं, लेकिन ‘ग्लोबल कॉर्पोरेशन’ के कॉन्फ्रेंस रूम नंबर 4 में माहौल बिल्कुल ‘अंटार्कटिका’ जैसा था। मेज के एक ओर डेविड आराम से बैठे थे, जबकि दूसरी तरफ बैठी एमिली के दांत किटकिटा रहे थे। उन्होंने भारी स्वेटर पहना हुआ था, वह तेज गर्मी में भी रोज इसे लाना नहीं भूलतीं। एमिली ने कांपते हाथों से फाइल समेटी और धीरे से कहा, ‘डेविड, क्या हम एसी का टेंप्रेचर बढ़ा सकते हैं?’ डेविड ने कहा,‘बाहर हीट वेव है, अगर एसी कम हुआ तो पसीने छूट जाएंगे।” यह बहस सिर्फ उन दोनों की नहीं थी, बल्कि अमेरिका और यूरोप के कॉरपोरेट ऑफिस में इन दिनों ‘थर्मोस्टेट वॉर’ छिड़ी है। जहां अनकहा नियम यही रहता है कि पुरुष को पसीना आने से बेहतर है महिला ठंड से ठिठुरे। शोधकर्ता कैरेन कोरेलिस रीदर बताती हैं कि ‘थर्मोस्टेट वॉर’ की जड़ महिलाओं की पसंद नहीं, बल्कि इमारतों की डिजाइनिंग है। आधुनिक दफ्तरों के एचवीएसी मानक 1960 के दशक के ‘आदर्श अमेरिकी पुरुष’ पर आधारित हैं। उस दौर में डेनिश इंजीनियर पोवल फेंगर ने ‘थर्मल कम्फर्ट मॉडल’ बनाया था, जिसमें औसत पुरुष कर्मचारी के मेटाबॉलिज्म व उसके पहनावे- थ्री-पीस वूलन सूट, ड्रेस शर्ट, मोजे और लेदर शूज को आधार माना गया। छह दशक बाद वर्कफोर्स और ड्रेस कोड पूरी तरह बदल चुके हैं, पर ज्यादातर बिल्डिंग इसी पुराने पुरुष-केंद्रित मानक पर काम कर रही हैं। एयर कंडीशनिंग तो उदाहरण है। पैटर्न बड़ा है- क्रैश टेस्ट डमी लंबे समय तक पुरुष शरीर पर आधारित रहीं। पीपीई भी अक्सर पुरुष अनुपात पर साइज होता है, महिलाओं को ढीले या गलत फिट गियर पहनने पड़ते हैं। सुरक्षा घटती है। बार-बार डिजाइन स्टैंडर्ड में ‘डिफॉल्ट ह्यूमन’ पुरुष ही निकलता है। कॉर्पोरेट अमेरिका में महिलाओं ने इस ‘कोल्ड वॉर’ के खिलाफ आवाज उठाई है। वे पुरुषों को याद दिला रही हैं कि अब पोलो शर्ट व स्नीकर्स का दौर है, तो फिर इतनी ठंड क्यों सहना? राहत की बात है कि पुरुष कर्मचारी भी इस पर सहमत हैं कि सदियों पुराने पुरुष-केंद्रित डिजाइन बदलना ही समस्या का समाधान है। इधर जापान में पुरुषों को शॉर्ट्स की छूट से महिलाएं नाराज बढ़ती गर्मी और बढ़ी ऊर्जा कीमतों के बीच, टोक्यो प्रशासन ने पहली बार सरकारी कर्मचारियों को ऑफिस में शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनने की छूट दी है और निजी कंपनियों को ऐसा ही करने का सुझाव दिया है। पर जापान के पारंपरिक वर्क-कल्चर में इसका विरोध हो रहा है। कामकाजी महिलाओं का मानना है कि दफ्तर में शॉर्ट्स व सैंडल पहनना शालीनता के खिलाफ है और बहुत अनौपचारिक लगता है। महिलाएं ऐसे समाधान चाहती हैं जो आराम व पेशेवर छवि दोनों को संतुलित करें।
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