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अब बड़े शहरों में दोस्ती और सोशल लाइफ की परिभाषा बदल रही है। अमेरिका और यूरोप के कई महानगरों में जिम और फिटनेस स्टूडियो केवल शरीर को फिट रखने की जगह नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सामाजिक जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। न्यूयॉर्क, लंदन और टोक्यो जैसे शहरों में लोग पहले कैफे, रेस्त्रां या पब में मिलते थे, लेकिन अब ग्रुप एक्सरसाइज सेशन, रनिंग ग्रुप और अलग-अलग फिटनेस एक्टिविटी में मिलने लगे हैं। तय समय पर एक ही जगह आने पर लोग धीरे-धीरे एक-दूसरे को पहचानने लगते हैं और फिर बातचीत से रिश्ता मजबूत होता है। हाल के कुछ वर्षों में डिजिटल लाइफ बढ़ने से लोगों के आमने-सामने मिलने का चलन कम हो गया था। ऐसे में अब फिटनेस स्पेस उनके लिए आसान विकल्प बन गया है, जहां सामाजिक जुड़ाव आपस में बन जाता है। ग्रुप वर्कआउट में लगातार मिलने से बढ़ता है जुड़ाव ग्रुप में होने वाली एक्सरसाइज क्लास, जैसे तेज ट्रेनिंग, रनिंग क्लब और अलग-अलग एक्टिविटी वाले इवेंट अब लोगों के मिलने-जुलने और दोस्त बनाने की जगह बन रहे हैं। लोग हर हफ्ते तय समय पर एक ही क्लास में शामिल होते हैं। इसी वजह से उन्हें बार-बार वही लोग मिलते हैं और धीरे-धीरे पहचान बनती है। जिम नहीं, ‘सोशल क्लब’ बन रहे फिटनेस सेंटर पिछले एक साल में युवा वर्ग ने फिटनेस क्लास और जिम पर करीब 30% खर्च में बढ़ोतरी हुई है। कई शहरों में लोग एक क्लास के लिए भी ज्यादा पैसे दे रहे हैं। महंगी फीस के बावजूद लोग इन्हें इसलिए चुन रहे हैं क्योंकि यहां सोशल संपर्क भी मिल रहा है। सालाना चार लाख रुपए तक फीस दे रहे युवा न्यूयॉर्क और लंदन में कुछ जगहों पर प्रीमियम जिम और फिटनेस क्लबों की सालाना फीस करीब 4.27 लाख रुपए प्रति वर्ष तक है। वहीं कुछ अल्ट्रा-लग्जरी फिटनेस प्रोग्राम की कीमत 16 लाख रुपए तक है। बावजूद लोग खास सोशल सर्कल के लिए यहां जाते हैं। 24 लाख लोग फिटनेस चैलेंज से जुड़े – अंतरराष्ट्रीय फिटनेस इवेंट हे-रॉक्स में इस बार 24 लाख लोग शामिल हुए। दौड़ और एक्सरसाइज वाला ऐसा आयोजन व्यायाम के साथ नए दोस्ती बनाने का जरिया बन रहा है।
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