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गांधी जयंती पर शेयर बाजार आज बंद: NSE-BSE पर ट्रेडिंग नहीं होगी; लगातार 8वें हफ्ते फिसला बाजार, मंदी के करीब सेंसेक्स-निफ्टी

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गांधी जयंती के मौके पर शुक्रवार, 2 अक्टूबर को आज भारतीय शेयर बाजार बंद है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ट्रेडिंग नहीं होगी। इस छुट्टी की वजह से निवेशक आज दोनों प्रमुख एक्सचेंजों पर शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में भी कोई कामकाज नहीं होगा। MCX में भी नहीं होगा कामकाज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) भी गांधी जयंती के अवसर पर बंद रहेगा। MCX में सुबह और शाम दोनों ही सेशंस में ट्रेडिंग नहीं होगी। लगातार 8वें हफ्ते फिसला बाजार, मंदी के करीब निफ्टी-सेंसेक्स एक दिन पहले गुरुवार को शेयर बाजार लगातार 8वें हफ्ते लाल निशान में बंद हुआ है। 1 अक्टूबर को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 570 अंक या 0.79% नीचे 71,910 पर बंद हुआ। निफ्टी में 198 अंक या 0.88% की गिरावट रही, ये 22,422 पर आ गया। ऑटो और मीडिया शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली रही। 25 साल में गिरावट का सबसे लंबा दौर ये लगातार 8वां हफ्ता है जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ है। ये पिछले 25 सालों में गिरावट का सबसे लंबा दौर है। इससे पहले साल 2001 में बाजार में लगातार 9 हफ्तों तक गिरावट आई थी। जनवरी में अपने 26,373 के ऑल-टाइम हाई स्तर से निफ्टी अब तक करीब 15% नीचे आ चुका है। शेयर बाजार के नियमों के मुताबिक, यदि बाजार अपने ऊपरी स्तर से 20% तक गिर जाता है, तो उसे ऑफिशियल ‘बेयर मार्केट’ मान लिया जाता है। शेयर बाजार में गिरावट की 3 मुख्य वजहें 1. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से तेजी से पैसा निकाला है। अकेले मंगलवार और बुधवार को 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेचे गए, जिससे इस हफ्ते बुधवार तक कुल बिकवाली लगभग 26 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई। विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 29 हजार करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। 2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: 10 साल के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज (यील्ड) बढ़कर 5.33% और 30 साल के बॉन्ड पर 5.67% पहुंच गया है। यह 2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने से विदेशी निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं, जिससे शेयरों में गिरावट बढ़ी है। 3. रुपए में गिरावट: डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपए में कमजोरी आई है। प्रति डॉलर रुपया गिरकर 95.98 के स्तर पर आ गया। हालांकि सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की बिक्री से रुपए को सहारा देने की कोशिश की गई, लेकिन करेंसी के कमजोर होने का सीधा नकारात्मक असर शेयर बाजार पर पड़ा।



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