5 घंटे पहले
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अभी ज्येष्ठ अधिक मास चल रहा है। इस महीने का पहला प्रदोष व्रत आज (28 मई) है। प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने की कामना से किया जाता है। इस व्रत में खासतौर पर शाम को यानी संध्या काल (प्रदोष काल) में भगवान की विशेष पूजा की जाती है।
प्रदोष व्रत क्या होता है?
प्रदोष शब्द का अर्थ है दिन और रात के संधि काल का समय, यानी सूर्यास्त के बाद का लगभग 2 घंटे का समय। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार को आती है, तो उसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। गुरुवार को गुरु ग्रह का दिन माना जाता है, जो ज्ञान, भाग्य और धर्म का प्रतीक है। इसलिए इस दिन किया गया प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
मान्यताओं के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। कुंडली के गुरु ग्रह से जुड़े दोष शांत होते हैं। अधिक मास में आने के कारण इस बार का प्रदोष व्रत और भी अधिक शुभ है।
ऐसे कर सकते हैं गुरु प्रदोष व्रत
स्नान के बाद घर के मंदिर में भगवान के सामने व्रत और पूजा करने का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद शिव-पार्वती का अभिषेक किया जाता है। जल-दूध, पंचामृत, बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, चंदन आदि चीजें शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। मिठाई का भोग लगाकर आरती की जाती है।
भक्त दिनभर व्रत रखते हैं। जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, वे फलाहार करते हैं। दूध और फलों के रस का सेवन करते हैं।
शाम को स्नान के बाद फिर से विधिवत शिव पूजा की जाती है। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप किया जाता है।
भगवान की कथाएं पढ़ी-सुनी जाती हैं। कई भक्त शिवपुराण का पाठ करते हैं। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में होते हैं। इस समय की गई पूजा साधारण समय की अपेक्षा में कई गुना ज्यादा शुभ फल देती है।
अधिक मास में करें ये शुभ काम
- अधिक मास में भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए। विष्णु पुराण, श्रीमद् भागवत पुराण, रामायण जैसे ग्रंथों का पाठ करना चाहिए। साधु-संतों के प्रवचन सुनना चाहिए। अपने इष्टदेव के मंत्रों का जप करें।
- इन दिनों में गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करें। नदी स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
- भगवान शिव का विशेष अभिषेक करें। शिवलिंग पर चंदन का लेप करें। बिल्व पत्र, धतुरा, आंकड़े के फूल, दही, पंचामृत, शहद आदि चीजें अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
- घर में विराजित बाल गोपाल का अभिषेक करें। भगवान को माखन-मिश्री और तुलसी चढ़ाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।
- इन दिनों में जूते-चप्पल, कपड़े, अनाज, खाना, तिल, गुड़, तेल, धन का दान करना चाहिए। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं।









