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30 साल से ज्यादा वक्त तक साथ रहने के बाद एलन हिकेनबॉटम और उनकी पत्नी ने तलाक लिया। शुरुआत में दोनों के बीच किताबों और कला को लेकर गहरा जुड़ाव था। दोनों ने मिलकर दो बच्चों की शानदार परवरिश की। पर बच्चे जब कॉलेज चले गए, तो एलन को एहसास हुआ कि वे अब रोमांटिक पार्टनर नहीं, बल्कि रूममेट्स बनकर रह गए हैं। दो साल की काउंसलिंग भी ये खालीपन न भर सकी। 67 वर्षीय एलन कहते हैं, ‘मैं जिंदगी को कमतर नहीं आंकना चाहता था, पर ऐसे जीने की इच्छा भी नहीं थी। मेरे पास शायद 40 साल और हैं, उनका क्या करूं…? इस उम्र में अलगाव की राह चुनने वाले एलन अकेले नहीं हैं। अमेरिका में बुजुर्गों के बीच ‘ग्रे डिवोर्स’ तेजी से बढ़ रहा है। 50 साल से ज्यादा उम्र के 40% तलाक इसी श्रेणी में आते हैं। समाजशास्त्रियों के अनुसार, उम्र के इस पड़ाव पर लोग खोखले रिश्तों में नहीं रहना चाहते। पहले लोग बच्चों या समाज के डर से साथ रहते थे, पर लंबी जीवन प्रत्याशा ने सोच बदली है। जुड़ाव व जीवंतता की कमी भी इसकी बड़ी वजह है। किन्से इंस्टीट्यूट के जस्टिन गार्सिया कहते हैं कि इतिहास में इंसान कभी इतने लंबे समय तक एक ही रिश्ते में नहीं रहा। पहले आजीवन वफादारी कुछ दशकों तक सीमित थी, पर आज जोड़े 50-60 साल साथ रहते हैं। अब शादी को लोग घर चलाने का नहीं, बल्कि वजूद पहचानने का जरिया मानते हैं। इसलिए ‘ठीक-ठाक’ रिश्ता बनाए रखने की सहनशीलता कम हो गई है।’ 73 वर्षीय गेल एमिघ जैसी महिलाएं तलाक के आर्थिक बोझ से बचने के लिए कानूनी प्रक्रिया के बिना अलग हो रही हैं। 40 साल साथ रहने के बाद उन्होंने आपसी सहमति से अलगाव किया, ताकि संपत्ति का बंटवारा आसान हो सके। गेल कहती हैं,‘पति के बगल में बैठकर भी अकेलापन लगता था।’ शोध बताते हैं… बुजुर्ग पुरुषों को अक्सर नया साथी जल्दी मिल जाता है, जबकि महिलाएं दोबारा शादी में कम रुचि दिखाती हैं। वे अपनी आजादी व सहेलियों का साथ पसंद करती हैं। गेल अब ट्रिप्स पर जा रही हैं, तीखा खाना बना रही हैं। कहती हैं,‘मैं मजबूत इंसान हूं, बच्चों व पति से बढ़कर भी कुछ हूं।’ भारत में 35% बढ़े मामले; महिलाएं मुखर हो रहीं – स्टडी भारत के महानगरों में बीते 7-8 साल में 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के दंपती द्वारा दायर किए गए मुकदमों में 35% की वृद्धि देखी गई है। महानगरों के फैमिली कोर्ट में आए मामलों की अलग-अलग स्टडी के अनुसार 68% मामलों में याचिकाकर्ता महिलाएं थीं। यानी भारतीय महिलाएं उम्र के उस पड़ाव पर चुप रहने को तैयार नहीं हैं, जहां उनके बच्चे आत्मनिर्भर हो चुके हैं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिसर्च के अनुसार जैसे ही बच्चे पढ़ाई या नौकरी के लिए दूर जाते हैं, बातचीत खत्म हो जाती है। यह ‘फंक्शनल मैरिज का अंत’ है, जहां शादी ‘खोखला डिब्बा’ बन जाती है।
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