जन्मदर बढ़ाने की अनूठी पहल:  बौद्ध भिक्षु युवाओं को शादी के लिए प्रेरित कर रहे; डेटिंग रिट्रीट में 24 युवाओं में से 8 जोड़े बने
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जन्मदर बढ़ाने की अनूठी पहल: बौद्ध भिक्षु युवाओं को शादी के लिए प्रेरित कर रहे; डेटिंग रिट्रीट में 24 युवाओं में से 8 जोड़े बने

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दक्षिण कोरिया में नौकरी की व्यस्तता, कम सामाजिक मेलजोल, अकेलापन और डिजिटल जीवनशैली ने रिश्ते बनाने के मौके कम कर दिए हैं। शादियां कम हो रही हैं। ऐसे में बौद्ध भिक्षु युवाओं को पार्टनर ढूंढ़ने में मदद कर रहे हैं। बौद्ध मंदिर सिर्फ आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि अब देश की घटती जन्मदर और टूटते सामाजिक रिश्तों को जोड़ने का नया माध्यम बन रहे हैं। द. कोरिया के पालगोंगसान पहाड़ पर बसे 8वीं सदी के डोंगह्वासा मंदिर में पिछले दिनों 30 घंटे की डेटिंग रिट्रीट हुई। यहां बौद्ध भिक्षु ने युवाओं को शादी कर परिवार बसाने और संतान पैदा करने के महत्व को बताया। डेटिंग रिट्रीट के आयोजक भिक्षु यू चोल-जू ने युवाओं से कहा, ‘आप देश को बचाने के मिशन पर हैं। पार्टनर खोजिए। शादी करें और परिवार बढ़ाएं।’ रिट्रीट में 24 प्रतिभागी थे। इनका चयन 1,600 आवेदकों में से हुआ था। चयन प्रक्रिया काफी कठिन थी। सवालों के जवाब, सेल्फी वीडियो से यह परखा गया कि वे शादी और बच्चों को लेकर कितने गंभीर हैं। इस कार्यक्रम में धर्म की बाध्यता नहीं थी। ​डेटिंग रिट्रीट में परिचय सत्र, जोड़ी बनाकर वॉक, लंच डेट, स्पीड डेटिंग, टैलेंट शो, फिर डिनर डेट हुए। अंत में 8 जोड़े बने। यानी 16 लोग संभावित पार्टनर के साथ लौटे। 32 वर्षीय सरकारी कर्मचारी मिन्हो और 28 वर्षीय डिजाइनर रूबी भी इसमें शामिल थे। दोनों पहली बार बौद्ध मंदिर के इसी कार्यक्रम में मिले। रिट्रीट के दो दिन बाद जब वे साथ लौटे तो उनके हाथ में सिर्फ गुलाब के फूल नहीं, बल्कि नए रिश्ते की उम्मीद थी। कुछ लोग पार्टनर बनाने में सफल नहीं हुए। उनके हाथ दोस्ती और आत्मविश्वास जरूर लगा। यू चोल-जू का कहना है, ‘पहले भिक्षु देश को बाहरी आक्रमणों से बचाने के लिए आगे आते थे। आज सबसे बड़ा संकट घटती जन्मदर है, इसलिए समाज की मदद करना हमारा दायित्व है।’ विवाह-बच्चे के प्रति रुझान दो साल में 10% बढ़ा द. कोरिया कई वर्षों से सबसे कम जन्मदर वाले देशों में शामिल है। 2023 में यहां कुल जन्मदर घटकर 0.72 रह गई थी, जबकि किसी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए 2.1 का स्तर जरूरी है। सरकार ने करोड़ा़ें रु. खर्च कर मातृत्व प्रोत्साहन, नकद सहायता, लंबी पैरेंटल लीव और नवविवाहितों के लिए सब्सिडी वाले घर जैसी योजनाएं शुरू कीं। इसमें अब बौद्ध मठ भी आगे आ रहे हैं। दिलचस्प यह है कि 2024 के बाद यहां जन्मदर में हल्का सुधार हुआ है। मार्च में हुए सर्वे से पता चला कि दो साल पहले की तुलना में अविवाहित युवाओं का रुझान शादी-बच्चे के प्रति 10% बढ़ा है।



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