18 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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यूनाइटेड नेशन के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) के मुताबिक, आलू दुनियाभर में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली सब्जियों में से एक है। ये कई सारे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है। लेकिन अगर आलू अंकुरित हो जाते हैं तो इसे खाने से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
अंकुरित आलू वे होते हैं, जिनमें अंकुर यानी ‘आंखें’ उगने लगती हैं। ये अक्सर तब होता है, जब उन्हें लंबे समय तक स्टोर किया जाता है। अक्सर वे क्लोरोफिल के कारण हरे रंग के हो जाते हैं, जो प्रकाश के संपर्क में आने पर बनता है।
नेशनल कैपिटल पॉइजन सेंटर मुताबिक, अंकुरित आलू सेहत के लिए सही नहीं होते हैं। इसमें सोलेनाइन और चाकोनाइन जैसे कुछ टॉक्सिक तत्व होते हैं। इसकी टॉक्सिसिटी से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम बात करेंगे कि आलू जल्दी अंकुरित क्यों होते हैं। साथ ही जानेंगे कि-
- अंकुरित आलू खाने से किस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?
- आलू काे स्टोर करने का सही तरीका क्या है?
एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ

सवाल- किन वजहों से आलू जल्दी अंकुरित होते हैं?
जवाब- आलू जमीन के नीचे उगने वाली सब्जी है, जिसमें नमी और स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है। यही कारण है कि यह जल्दी अंकुरित हो जाता है। गर्म और नमी वाली जगह पर रखे आलू तेजी से अंकुरित होने लगते हैं। इसी तरह जब आलू पर रोशनी पड़ती है तो उनमें क्लोरोफिल बनने लगता है और अंकुर निकल आते हैं।
अगर आलू को ऐसी जगह रखा जाए, जहां हवा न मिले तो वे जल्दी पसीज जाते हैं और अंकुरण शुरू हो जाता है। लंबे समय तक रखने पर आलू अपनी नेचुरल प्रोसिजर से भी अंकुरित होने लगते हैं।
इसके अलावा प्याज-लहसुन जैसी सब्जियां इथिलीन गैस छोड़ती हैं, जो आलू के अंकुरण को तेज करती हैं। कुल मिलाकर यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। ये अंकुर वास्तव में नए आलू के पौधे होते हैं।
सवाल- क्या अंकुरित आलू में न्यूट्रिशन की कमी हो जाती है?
जवाब- जब आलू अंकुरित होने शुरू होते हैं तो यह नए अंकुरों के ग्रोथ के लिए अपने न्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे आलू की न्यूट्रिशनल वैल्यू में कमी आ सकती है। आलू विटामिन C का एक अच्छा स्रोत है, लेकिन अंकुरित होने पर इसकी मात्रा कम हो जाती है।
अंकुरण की प्रक्रिया में आलू में मौजूद स्टार्च शुगर में परिवर्तित हो जाता है, जिससे उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बढ़ जाता है। इसके अलावा अंकुरित आलू में अन्य विटामिन और मिनरल्स जैसे पोटेशियम, विटामिन B, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा भी कम हो जाती है।
सवाल- अंकुरित आलू खाने से कौन सी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?
जवाब- अंकुरित आलू में सोलेनाइन और चाकोनाइन नामक टॉक्सिक ग्लाइकोएल्कलॉइड होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसकी ज्यादा मात्रा से मतली, उल्टी, दस्त और पेट में ऐंठन हो सकती है। इसलिए अंकुरित आलू खाने से बचना चाहिए।
अंकुरित आलू खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कुछ और भी समस्याएं हो सकती हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- अंकुरित आलू खाना किन लोगों के लिए ज्यादा नुकसानदायक हाे सकता है?
जवाब- सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि ताजे आलू की तुलना में अंकुरित आलू ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा देता है। यही कारण है कि डायबिटिक मरीजों को इसे बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा कुछ और लोगों के लिए भी अंकुरित आलू स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक साबित हो सकते हैं। जैसेकि-
- गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग।
- पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोग।
- न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम वाले मरीज।
- कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्ति।
- एलर्जी से पीड़ित लोग।
इन सभी लोगों में अंकुरित आलू से होने वाले सोलनाइन टॉक्सिसिटी का खतरा ज्यादा होता है, जो पेट दर्द, उल्टी, सिरदर्द और चक्कर जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
सवाल- आलू को कैसे स्टोर करें कि वह जल्दी अंकुरित न हो?
जवाब- आलू को अंकुरित होने से बचाने के लिए उसे ठंडी, अंधेरी और हवादार जगह पर 45-50°F (7-10°C) के बीच स्टोर करें। इन्हें कभी भी फ्रिज में स्टोर न करें क्योंकि ठंडक स्टार्च को शुगर में बदल देती है और आलू का स्वाद मीठा हो जाता है।
आलू को प्याज या नमी वाली सब्जियों के पास न रखें। इन्हें जालीदार थैले या पेपर बैग में रखें ताकि हवा आती-जाती रहे। आलू को ज्यादा समय तक न रखें, समय-समय पर खराब या अंकुरित आलू को अलग करते रहें। इसके अलावा कुछ और बातों का ख्याल रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- अंकुरित आलू को फेंकने की बजाय और किस काम में लाया जा सकता है?
जवाब- खाने या फेंकने की बजाय अंकुरित आलू का उपयोग कई अन्य कामों में किया जा सकता है। जैसेकि-
- अंकुरित आलू को छोटे टुकड़ों में काटकर कंपोस्ट बिन में डाल दें। सड़ने के बाद यह मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ाकर पौधों की ग्रोथ के लिए फायदेमंद साबित होंगे।
- अंकुरित आलू को पीसकर उसका रस पौधों पर छिड़कें। यह एक नेचुरल पेस्टिसाइड की तरह काम करता है और छोटे कीड़ों को दूर रखने में मदद करता है।
- आलू का रस स्किन पर लगाने से टैनिंग और डार्क स्पॉट्स कम करने में मदद मिलती है। हालांकि इसे लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है।
- अंकुरित आलू को गमले या खेत की मिट्टी में लगा सकते हैं। इससे नए आलू के पौधे उग जाते हैं।
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