जरूरत की खबर- आज वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे:  दुनिया से जाने वाले 8 लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं, जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब
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जरूरत की खबर- आज वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे: दुनिया से जाने वाले 8 लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं, जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब

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46 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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किसी इंसान की जिंदगी बचाने के लिए अपना कोई अंग दे देना, शायद इससे बड़ा मानवीय उपहार कुछ नहीं हो सकता। लेकिन भारत में हर साल हजारों लोग सिर्फ इसलिए समय से पहले जिंदगी से हार मान जाते हैं, क्योंकि हमारे देश में जरूरत के मुताबिक डोनर नहीं हैं।

जबकि सच तो ये है कि एक इंसान अपने ऑर्गन डोनेट करके इस दुनिया से जाने के बाद भी 8 लोगों को नई जिंदगी दे सकता है। अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 13 अगस्त को दुनियाभर में ‘वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे’ मनाया जाता है।

भारत में ऑर्गन डोनेशन को लेकर लोगों में जागरूकता बहुत कम है। यही वजह है कि यहां अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है।

‘नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन’ (NOTTO) के मुताबिक, मार्च 2026 तक देश में करीब 90 हजार मरीज ऑर्गन ट्रांसप्लांट की वेटिंग लिस्ट में थे, जबकि 2025 में करीब 20 हजार ऑर्गन ट्रांसप्लांट ही हो सके।

वहीं ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ-ईस्ट एशिया’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, साल 2021 में भारत में किडनी, लिवर, हार्ट और लंग्स के करीब 3.9 लाख ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। रिसर्चर्स का अनुमान है कि 2040 तक यह जरूरत बढ़कर करीब 4.63 लाख सालाना हो सकती है।

अंगदान की जरूरत इतनी ज्यादा होने के बावजूद इसे लेकर लोगों के मन में कई सवाल और गलतफहमियां हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में ऑर्गन डोनेशन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • ऑर्गन डोनेशन के लिए क्या मेडिकल शर्तें हैं?
  • अंगदान से जुड़े कॉमन मिथ और उनकी सच्चाई क्या है?

एक्सपर्ट- डॉ. अत्तार मोहम्मद इस्माइल, कंसल्टेंट, यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई

सवाल- ऑर्गन डोनेशन क्या है?

जवाब- ऑर्गन डोनेशन यानी किसी जरूरतमंद मरीज के इलाज के लिए अपने अंग या टिश्यू दान करना। ऑर्गन डोनेशन दो तरह से होता है-

लिविंग डोनर: व्यक्ति जीवित रहते हुए कुछ अंग या उनका हिस्सा डोनेट करता है।

डिसीज्ड डोनर: व्यक्ति की मृत्यु के बाद मेडिकल एलिजिबिलिटी पूरी होने पर अंग डोनेट किए जाते हैं।

सवाल- एक ऑर्गन डोनर कितने लोगों की जान बचा सकता है?

जवाब- एक मृत ऑर्गन डोनर कम–से–कम 8 लोगों की जान बचा सकता है। इसके अलावा कॉर्निया, स्किन, हड्डियां, हार्ट वाल्व, टेंडन और अन्य टिश्यू डोनेट करके 50 से ज्यादा लोगों की जिंदगी बेहतर बना सकता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- ऑर्गन डोनेशन और ऑर्गन ट्रांसप्लांट में क्या अंतर है?

जवाब- ऑर्गन डोनेशन में कोई व्यक्ति अपना अंग दान करता है। वहीं, ऑर्गन ट्रांसप्लांट में डॉक्टर उस डोनेट किए गए अंग को जरूरतमंद मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित करते हैं। ग्राफिक में दोनों के बीच का फर्क देखिए-

सवाल- कौन-से अंग डोनेट किए जा सकते हैं?

जवाब- शरीर के कई अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इनमें कुछ अंग जीवित व्यक्ति डोनेट कर सकता है, जबकि हार्ट और लंग्स जैसे अंग मृत्यु के बाद ही डोनेट किए जा सकते हैं।

सवाल- क्या कोई भी व्यक्ति ऑर्गन डोनेट कर सकता है?

जवाब- नहीं, यह व्यक्ति की उम्र, हेल्थ कंडीशन और डोनेट किए जाने वाले अंग की स्थिति पर निर्भर करता है। मेडिकल जांच के बाद डॉक्टर तय करते हैं कि व्यक्ति ऑर्गन डोनेट कर सकता है या नहीं।

सवाल- ऑर्गन डोनेट करने की न्यूनतम उम्र क्या है?

जवाब- भारत में जीवित व्यक्ति आमतौर पर 18 साल या उससे अधिक उम्र में अंगदान कर सकता है। वहीं मृत्यु के बाद अंगदान के लिए कोई न्यूनतम उम्र तय नहीं है। बच्चों के अंग और टिश्यू भी मेडिकली उपयुक्त होने पर डोनेट किए जा सकते हैं।

18 साल से कम उम्र के मृत व्यक्ति के अंगदान के लिए माता-पिता या नियमों के तहत अधिकृत व्यक्ति की सहमति जरूरी है।

बीमारी और ऑर्गन डोनेशन

सवाल- क्या टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज होने पर अंगदान किया जा सकता है?

जवाब- हां, टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटिक व्यक्ति कुछ स्थितियों में अंगदान कर सकता है। इसका फैसला डॉक्टर करते हैं।

सवाल- जिन्हें हाई BP है, क्या वे अंगदान कर सकते हैं? जवाब- हां, अगर BP कंट्रोल में है और इससे शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान नहीं हुआ है, तो अंगदान किया जा सकता है।

सवाल- जिन्हें ओबिसिटी है, क्या वे अंगदान कर सकते हैं?

जवाब- हां, लेकिन यह ओबिसिटी की गंभीरता और व्यक्ति की ओवरऑल हेल्थ पर निर्भर करता है। इसलिए डॉक्टर मेडिकल टेस्ट के बाद तय करते हैं कि अंगदान सेफ है या नहीं।

सवाल- अगर किसी व्यक्ति का एक अंग खराब हो तो क्या वे दूसरे स्वस्थ अंग को डोनेट कर सकते हैं?

जवाब- हां, अगर बीमारी ने दूसरे अंगों को प्रभावित नहीं किया है, तो डॉक्टर उनका टेस्ट करके डोनेशन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति का हार्ट डोनेशन के लायक न हो, लेकिन उसकी किडनी या लिवर हेल्दी हों, तो वे डोनेट किए जा सकते हैं।

सवाल- क्या स्मोकिंग करने वाले लोग ऑर्गन डोनेट कर सकते हैं?

जवाब- हां, अगर स्मोकिंग से फेफड़े या हार्ट खराब हो चुके हैं, तो इन्हें डोनेट नहीं किया जा सकता। लेकिन किडनी, लिवर जैसे दूसरे अंग स्वस्थ हैं, तो व्यक्ति उन्हें डोनेट कर सकता है।

सवाल- क्या कैंसर के मरीज ऑर्गन डोनेट कर सकते हैं?

जवाब- यह कैंसर के प्रकार और उसकी स्थिति पर निर्भर करता है।

  • एक्टिव या फैला हुआ कैंसर होने पर आमतौर पर अंगदान नहीं किया जाता, क्योंकि कैंसर रिसीपिएंट तक पहुंचने का जोखिम होता है।
  • शुरुआती या पूरी तरह ठीक हो चुके कैंसर के मामलों में डॉक्टर मेडिकल जांच के बाद टिश्यू (जैसे कॉर्निया) या कुछ अंगों को डोनेट करने की अनुमति दे सकते हैं।
  • ल्यूकेमिया, लिंफोमा, मल्टीपल मायलोमा जैसे ब्लड कैंसर के मामलों में अंगदान नहीं किया जा सकता है।

याद रखने वाली बात

सवाल- भारत में हर साल कितने लोगों को ऑर्गन नहीं मिलने के कारण जान गंवानी पड़ती है?

जवाब- इसका कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक, भारत में अंगों की कमी के कारण हर साल करीब 5 लाख लोगों की मौत हो जाती है।

सवाल– भारत में ऑर्गन डोनेशन की दर दुनिया के मुकाबले कितनी है?

जवाब- साल 2024 में भारत में हर 10 लाख लोगों पर करीब 0.8 डिसीज्ड डोनर यानी 1 से भी कम थे। इसके मुकाबले स्पेन में हर 10 लाख पर करीब 54 और अमेरिका में करीब 50 मृत अंगदाता हैं। ग्राफिक में देखिए-

सबसे जरूरी सवाल

सवाल- ऑर्गन डोनेट करने के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-

  • ‘NOTTO’ की वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है।
  • ‘ऑर्गन डोनर प्लेज’ सेक्शन में जाकर जरूरी जानकारी भरनी होती है।
  • प्रक्रिया पूरी होने के बाद डोनर कार्ड मिलता है।
  • रजिस्ट्रेशन के बाद अपने परिवार को अंगदान की इच्छा के बारे में जरूर बताएं।
  • केवल डोनर कार्ड होने से मृत्यु के बाद अपने-आप अंगदान नहीं होता।
  • उस समय परिवार की सहमति और मेडिकल सूटेबिलिटी के आधार पर आगे की प्रक्रिया होती है।

सवाल- परिवार पहले से किन बातों पर चर्चा कर ले, ताकि जरूरत पड़ने पर निर्णय आसान हो?

जवाब- इसके लिए डोनर को परिवार से कुछ बातें जरूर डिस्कस कर लेनी चाहिए। जैसेकि-

  • व्यक्ति किन अंगों और टिश्यू को डोनेट करना चाहता है?
  • उसने ऑर्गन डोनेशन का रजिस्ट्रेशन किया है या नहीं?
  • डोनर कार्ड या रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी कहां उपलब्ध है?
  • परिवार में जरूरत पड़ने पर अंगदान की सहमति कौन देगा?

परिवार को अंगदान की प्रक्रिया और अंतिम संस्कार से जुड़े सवालों की सही जानकारी है या नहीं?

अंगदान से जुड़े मिथ और सच्चाई

मिथ 1: ऑर्गन डोनेट करने के बाद मृत शरीर विकृत हो जाता है।

सच्चाई- डॉक्टर सर्जरी के जरिए अंग निकालते हैं और चीरे को ठीक से बंद कर देते हैं। इसके बाद शरीर को सम्मानपूर्वक परिवार को सौंप दिया जाता है।

मिथ 2- अंगदान के बाद शव का अंतिम संस्कार या धार्मिक रीति-रिवाज सामान्य तरीके से नहीं हो सकते?

सच्चाई- अंगदान के बाद परिवार शव का अंतिम संस्कार और धार्मिक रीति-रिवाज सामान्य तरीके से कर सकता है।

मिथ 3: बुजुर्ग लोग ऑर्गन डोनेट नहीं कर सकते।

सच्चाई- ज्यादा उम्र अपने आप में अंगदान में बाधा नहीं बनती। डॉक्टर उम्र के साथ अंगों की स्थिति देखते हैं और तय करते हैं कि कौन-से अंग डोनेट किए जा सकते हैं।

मिथ 4: डोनेट किए गए अंग सिर्फ अमीर लोगों को ही मिलते हैं।

सच्चाई- अंग मरीज की आर्थिक स्थिति देखकर आवंटित नहीं किए जाते। भारत में निर्धारित वेटिंग लिस्ट और मेडिकल मानकों के आधार पर अंगों का आवंटन होता है। इसमें मेडिकल जरूरत, ब्लड ग्रुप, अंग की अनुकूलता और वेटिंग लिस्ट जैसे फैक्टर देखे जाते हैं।

मिथ 5: ऑर्गन डोनेशन से अंगों की खरीद-फरोख्त होती है।

सच्चाई- भारत में मानव अंगों को खरीदना या बेचना गैरकानूनी है।

मिथ 6: ऑर्गन डोनेट करने के लिए पहले से कार्ड बनवाना जरूरी है।

सच्चाई- यह व्यक्ति की अंगदान की इच्छा दर्ज करने का एक तरीका है। मृत्यु के बाद मेडिकल सूटेबिलिटी और जरूरी सहमति के आधार पर अंगदान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

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