जरूरत की खबर- क्या आपका मोबाइल फोन असली है?:  ऐसे करें असली-नकली की पहचान, खरीदने से पहले चेक करें IMEI नंबर
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जरूरत की खबर- क्या आपका मोबाइल फोन असली है?: ऐसे करें असली-नकली की पहचान, खरीदने से पहले चेक करें IMEI नंबर

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31 मिनट पहलेलेखक: शशांक शुक्ला

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आज का बाजार हर तरह के प्रोडक्ट्स की फर्स्ट कॉपी से भरा पड़ा है। चाहे वह ब्रांडेड जूते हों, कपड़े, घड़ियां, कॉस्मेटिक्स, ईयरबड्स म्यूजिक सिस्टम और यहां तक कि स्मार्टफोन भी कॉपी बिकते हैं।

दिखने में ये सामान बिल्कुल असली जैसे लगते हैं, लेकिन क्वालिटी, टिकाऊपन और सेफ्टी के मामले में असली के पास भी नहीं ठहरते हैं। कई बार ग्राहक बड़े-बड़े ब्रांड्स के नाम पर ठगे जाते हैं और उन्हें नकली सामान मिल जाता है।

ऐसे नकली प्रोडक्ट न सिर्फ पैसों का नुकसान करते हैं, बल्कि सुरक्षा पर भी असर डाल सकते हैं। इसलिए बाजार में खरीदारी करते वक्त असली-नकली की पहचान करना बेहद जरूरी है।

ऐसे में आज हम जरूरत की खबर में जानेंगे कि-

  • मोबाइल खरीदते वक्त कौन-सी सावधानियां बरतें?
  • मोबाइल असली या नकली, इसकी पहचान कैसे करें?

सवाल- मोबाइल खरीदते समय कौन-सी सावधानियां बरतनी जरूरी हैं?

जवाब- मोबाइल खरीदते समय कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है, ताकि आप नकली फोन का शिकार न बनें। सबसे पहले कोशिश करें कि हमेशा ब्रांडेड स्टोर या भरोसेमंद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ही फोन खरीदें।

अगर कहीं बहुत सस्ती डील दिख रही है, तो उस पर तुरंत भरोसा न करें, क्योंकि अक्सर ऐसी डील्स में नकली या रिफर्बिश्ड फोन बेचे जाते हैं। खरीदते समय पैकिंग, सील और बिल को अच्छी तरह चेक करना न भूलें।

फोन ऑन करके सेटिंग्स में जाकर IMEI और मॉडल नंबर की जांच करें और उसे आधिकारिक पोर्टल पर वेरिफाई करें। वहीं, अगर आप ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं, तो कस्टमर रिव्यू और सेलर की रेटिंग जरूर देखें, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

सवाल- मोबाइल असली है या नकली, कैसे पता करें?

जवाब- असली और नकली मोबाइल की पहचान करने के कई तरीके हैं। सबसे आसान तरीका है IMEI नंबर चेक करना। हर असली फोन का एक यूनीक IMEI नंबर होता है जिसे आप *#06# डायल करके देख सकते हैं।

इस नंबर को आप सरकारी साइट या ब्रांड की वेबसाइट पर वेरिफाई कर सकते हैं।

इसके अलावा, नकली फोन की डिस्प्ले क्वालिटी, कैमरा रिजॉल्यूशन और बैटरी परफॉर्मेंस जल्दी खराब हो जाती है, जबकि असली फोन लंबे समय तक टिकता है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं।

सवाल- फोन खरीदने से पहले बिल और वारंटी क्यों जरूरी है?

जवाब- बिल और वारंटी इस बात का सबूत होते हैं कि आपने फोन असली और अधिकृत डीलर से खरीदा है। नकली या फर्स्ट कॉपी फोन में आमतौर पर असली वारंटी कार्ड नहीं होता।

अगर फोन खराब हो जाए और वारंटी न हो, तो आपको बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए हमेशा ऑथेंटिक बिल और ब्रांडेड वारंटी कार्ड जरूर लें।

सवाल- नकली फोन से डेटा और प्राइवेसी पर कितना खतरा है?

जवाब- नकली फोन का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह आपके डेटा को सुरक्षित रखने में असमर्थ होता है। ऐसे फोन में समय पर सिक्योरिटी अपडेट्स नहीं मिलते, जिससे आपका डेटा हमले के लिए हमेशा खुला रहता है।

इसके अलावा, इनमें पहले से ही मालवेयर या स्पाइवेयर मौजूद हो सकते हैं, जो आपकी गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।

इससे आपकी बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड और अन्य पर्सनल जानकारी आसानी से चोरी होने का खतरा रहता है। ऐसे फोन का इस्तेमाल करने से प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।

सवाल- बहुत सस्ते दाम में फोन मिलने पर क्या करें?

जवाब- अगर किसी ब्रांडेड फोन की कीमत अचानक आधी या उससे भी कम दिखाई दे, तो सतर्क हो जाएं। अक्सर यह नकली फोन बेचने का तरीका होता है।

असली ब्रांड्स की कीमतें अधिकृत वेबसाइट और स्टोर्स पर लगभग समान रहती हैं। ऐसे में कीमत देखकर तुरंत खरीदारी करने से बचें।

सवाल- ऑनलाइन फोन खरीदते समय कैसे सावधानी बरतें?

जवाब- ऑनलाइन खरीदारी में सबसे बड़ा धोखा फेक सेलर्स से होता है। इसलिए हमेशा ट्रस्टेड प्लेटफॉर्म्स से ही खरीदें और खरीदने से पहले कस्टमर रिव्यू और रेटिंग जरूर पढ़ें।

अगर किसी प्रोडक्ट पर निगेटिव रिव्यू ज्यादा हैं, तो वह फोन नकली या खराब क्वालिटी का हो सकता है। साथ ही, ‘ओपन बॉक्स’ या ‘यूज्ड फोन’ का टैग दिखे तो उसे लेने से बचें।

सवाल- नकली मोबाइल इस्तेमाल करने के क्या खतरे हैं?

जवाब- इसके कई सारे नुकसान हैं। आइए इसके बारे में ग्राफिक के जरिए समझते हैं।

सवाल- क्या रिफर्बिश्ड फोन को ही नकली फोन कहा जाता है?

जवाब- नहीं, रिफर्बिश्ड फोन और नकली फोन दोनों बिल्कुल अलग होते हैं। रिफर्बिश्ड फोन असली ब्रांडेड कंपनियों के ही फोन होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि ग्राहक फोन खरीदने के बाद किसी वजह से उसे वापस कर देते हैं।

जैसे किसी तकनीकी दिक्कत, बॉक्स डैमेज या मन बदल जाने पर। कंपनी उन फोनों को वापस लेकर उनकी टेस्टिंग और रिपेयर करती है, फिर क्वालिटी चेक के बाद उन्हें दोबारा बेचती है।

ऐसे फोन रिफर्बिश्ड कहलाते हैं और इन पर कंपनी की असली वॉरंटी और सपोर्ट भी मिलता है।

वहीं, नकली फोन पूरी तरह फेक होते हैं। इन्हें असली ब्रांड्स की नकल करके तैयार किया जाता है, लेकिन इनमें न तो असली कंपनी की टेक्नोलॉजी होती है, न ही कोई असली वॉरंटी।

दिखने में ये असली जैसे लग सकते हैं, मगर क्वालिटी और परफॉर्मेंस के मामले में बेहद कमजोर साबित होते हैं। यही वजह है कि रिफर्बिश्ड फोन सुरक्षित माने जाते हैं, जबकि नकली फोन बड़े जोखिम लेकर आते हैं।

सवाल- नकली फोन का पता सिर्फ IMEI से ही चलता है क्या?

जवाब- IMEI चेक सबसे आसान और भरोसेमंद तरीका है, लेकिन इसके अलावा भी पहचान के तरीके हैं। जैसे फोन की बॉडी क्वालिटी, कैमरे का रिजॉल्यूशन, स्पेलिंग मिस्टेक्स वाली पैकिंग और बहुत सस्ती कीमत भी नकली होने के संकेत हैं।

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