30 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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हाल ही में तमिलनाडु सरकार ने रंगीन पापड़ों (फ्राइम्स/कचरी) की बिक्री पर रोक लगा दी है। राज्य के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने जांच में पाया कि इनमें सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल हो रहा था, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। विभाग ने इसे खासकर बच्चों की सेहत के लिए खतरा बताया है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में रंगीन पापड़ के हेल्थ रिस्क पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- पापड़ खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
- रंगीन पापड़ की जगह कौन-से हेल्दी स्नैक्स खा सकते हैं?
एक्सपर्ट-
डॉ. आशीष मेहरोत्रा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर
डॉ. उमेश कुमार, फूड एनालिस्ट, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश
सवाल- रंगीन पापड़ क्या है और ये सामान्य पापड़ से कैसे अलग है?
जवाब- आइए इसे सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं-
रंगीन पापड़
- ये मैदा, आलू, साबूदाना, चावल या अन्य स्टार्च से बनाए जाते हैं।
- इन्हें आकर्षक दिखाने के लिए अलग-अलग रंग मिलाए जाते हैं।
- तलने पर ये फूलकर कुरकुरे हो जाते हैं और रंग-बिरंगे दिखते हैं।
सामान्य पापड़
- ये उड़द, मूंग, चावल या अन्य दालों के आटे, मसालों और नमक से बनते हैं।
- इनमें आमतौर पर आर्टिफिशियल कलर नहीं मिलाए जाते हैं।
- इन्हें तलने के साथ-साथ भूनकर भी खाया जा सकता है।
सवाल- तमिलनाडु सरकार ने रंगीन पापड़ की बिक्री पर बैन क्यों लगाया?
जवाब- तमिलनाडु सरकार ने बैन इसलिए लगाया क्योंकि-
- इनमें सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल हो रहा था।
- ये रंग सेहत के लिए खतरनाक हैं।
- पब्लिक हेल्थ के लिए खतरा हैं।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है।
सवाल- इन फ्राइम्स/कचरी में किन आर्टिफिशियल चीजों की मिलावट पाई गई?
जवाब- तमिलनाडु फूड सेफ्टी विभाग की जांच में कुछ रंगीन पापड़ों में ऐसे सिंथेटिक फूड कलर्स के इस्तेमाल की बात सामने आई, FSSAI के नियमों के तहत जिनके उपयोग की अनुमति नहीं है। अधिकारियों ने विशेष रूप से आर्टिफिशियल कलर्स के हेल्थ रिस्क को देखते हुए इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है।
इसके पहले कई हेल्थ स्टडीज, रिसर्च और जांच में यह बार-बार कहा जा चुका है कि खाने-पीने की चीजों में मिलाए जाने वाले सिंथेटिक फ्लेवर और कलर सेहत के लिए खतरनाक हैं। FSSAI ने भी इसके मानक तय किए हैं और कुछ सिंथेटिक कलर्स को बैन किया है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- सिंथेटिक कलर मिले फूड से कौन-से हेल्थ रिस्क हो सकते हैं?
जवाब- जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि फूड में कौन-सा सिंथेटिक रंग यूज हुआ है और उसकी मात्रा कितनी है। सभी संभावित हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- ये फूड छोटे बच्चों के लिए ज्यादा नुकसानदायक क्यों है?
जवाब- छोटे बच्चों का शरीर अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता और उनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, इसलिए वे टॉक्सिन्स के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होते हैं। ऐसे में थोड़ी मात्रा में भी सिंथेटिक कलर उनकी सेहत पर ज्यादा असर डाल सकता है।
कुछ बच्चों में इससे एलर्जी, डाइजेस्टिव इश्यू और हाइपरएक्टिविटी का जोखिम बढ़ सकता है।
सवाल- क्या घर में बने रंगीन पापड़ भी नुकसानदायक हो सकते हैं?
जवाब- देखिए, खतरनाक घर या बाहर का पापड़ नहीं, बल्कि उसमें मिलाया जाने वाला आर्टिफिशियल कलर है।
अगर घर में भी बाजार से खरीदकर आर्टिफिशियल कलर मिलाया जाए तो वो भी उतना ही खतरनाक होगा।
अगर घर में कलर के लिए हल्दी, चुकंदर, पालक जैसे नेचुरल कलर्स का इस्तेमाल किया जाए तो वह पूरी तरह सुरक्षित है।
सवाल- खाने में आर्टिफिशियल कलर मिलाने को लेकर FSSAI का नियम क्या कहता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- FSSAI के मुताबिक, खाने की चीजों में सिर्फ वही फूड कलर मिलाए जा सकते हैं, जिनकी अनुमति है। इनकी भी मात्रा निर्धारित है।
- नॉन-परमिटेड कलर्स का उपयोग या तय सीमा से ज्यादा मात्रा में रंग मिलाना नियमों का उल्लंघन है।
- इसके अलावा पैकेज्ड फूड्स के लेबल पर इस्तेमाल किए गए रंग की जानकारी देना जरूरी है।
सवाल- किन फूड आइटम्स में रंग मिलाने की अनुमति है और किनमें नहीं?
जवाब- FSSAI के नियमों के अनुसार, केवल कुछ तय फूड कैटेगरी में ही अप्रूव्ड फूड कलर्स निर्धारित सीमा के भीतर मिलाए जा सकते हैं। जैसेक-
- कैंडी, टॉफी, च्युइंगम।
- बिस्कुट, केक और कुछ बेकरी प्रोडक्ट्स।
- आइसक्रीम, जेली, डेजर्ट।
- जैम, जेली, मार्मलेड।
- कार्बोनेटेड और फ्लेवर्ड ड्रिंक्स।
- कुछ नमकीन, स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड।
- कुछ कन्फेक्शनरी और सॉस।
इन फूड आइटम्स में अनुमति नहीं
- ताजे फल और सब्जियां।
- दूध, दही, घी।
- अनाज, दालें, आटा।
- मांस, अंडे।
- शहद

सवाल- क्या पापड़ में आर्टिफिशियल कलर मिलाने की अनुमति है?
जवाब- नहीं, FSSAI के अनुसार, पापड़ में आर्टिफिशियल फूड कलर मिलाने की अनुमति नहीं है।
सवाल- क्या पापड़ तलने या सेंकने से आर्टिफिशियल कलर का असर खत्म हो जाता है?
जवाब- नहीं, अगर इनमें नॉन-परमिटेड या ज्यादा मात्रा में आर्टिफिशियल कलर मिलाए गए हैं, तो तलने या सेंकने के बाद भी हेल्थ रिस्क बना रहता है।
सवाल- रंगीन पापड़ की जगह कौन-से हेल्दी स्नैक्स खा सकते हैं?
जवाब- रंगीन पापड़ों की जगह ऐसे स्नैक्स चुनें, जिनमें आर्टिफिशियल कलर और ज्यादा नमक या तेल न हो। घर में बने या कम प्रोसेस्ड स्नैक्स ज्यादा बेहतर विकल्प हैं। ग्राफिक में सभी हेल्दी ऑप्शन देखिए-

सवाल- रेडीमेड पापड़ या कोई भी पैकेज्ड फूड खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब- अगर पापड़ अपने नेचुरल कलर में है तो उसमें मिलावट की आशंका कम होती है। लेकिन फिर भी ये जरूरी है कि हम एक जागरूक उपभोक्ता बनें। चाहे पापड़ हो या कोई भी पैकेज्ड फूड, खरीदने से पहले ध्यान रखना चाहिए। साथ ही ये 6 चीजें जरूर चेक करनी चाहिए-

सवाल- अगर किसी फूड में आर्टिफिशियल कलर या किसी खतरनाक केमिकल की मिलावट का शक हो तो कहां शिकायत करें?
जवाब- राज्य के फूड सेफ्टी विभाग से इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा FSSAI के ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ पोर्टल/एप पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
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