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- Homemade Khoya Recipe; Real Vs Fake Mawa Adulteration Purity Test Methods | Raksha Bandhan 2026
6 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा
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हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटी खोया के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की। कानपुर, मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद से अब तक करीब 4,000 किलो मिलावटी खोया जब्त करके उसे नष्ट किया जा चुका है।
जांच में पता चला कि कुछ लोग खोया में डिटर्जेंट, टैल्कम पाउडर, स्किम्ड मिल्क पाउडर, पाम ऑयल और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड जैसी चीजों का इस्तेमाल कर रहे थे।
मिलावटी खोया खाने से पेट दर्द, अपच, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय में इससे लिवर और किडनी डैमेज का रिस्क होता है।
रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है। इस दौरान बाजार में मिठाइयों की डिमांड बढ़ जाती है। मिलावटखोर इसी का फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में त्योहार पर मिठाई खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में मिलावटी खोया पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- मिलावटखोर इसमें कौन-सी चीजें मिलाते हैं?
- मिलावटी खोया की पहचान कैसे करें?
- असली खोया कैसे तैयार होता है?
एक्सपर्ट-
देवेन्द्र कुमार दुबे, फूड सेफ्टी ऑफिसर, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, दमोह
डॉ. आशीष मेहरोत्रा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर
सवाल- असली खोया कैसे तैयार किया जाता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- असली खोया सिर्फ दूध से तैयार किया जाता है।
- दूध को कड़ाही में धीमी आंच पर लगातार उबाला और चलाया जाता है।
- दूध का पानी धीरे-धीरे उड़ जाता है और आखिर में गाढ़े दूध के ठोस तत्व बचते हैं। इन्हें खोया या मावा कहते हैं।
- अच्छी क्वालिटी का खोया हल्के पीले या क्रीम रंग का होता है।
- इसका टेक्सचर मुलायम होता है। इसमें दूध जैसी खुशबू होती है।
सवाल- खोया जल्दी खराब क्यों होता है?
जवाब- इसमें काफी मात्रा में प्रोटीन, फैट और अन्य पोषक तत्व होते हैं। साथ ही इसमें कुछ नमी भी बनी रहती है। ये सभी चीजें बैक्टीरिया और फफूंद पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती हैं। इसलिए खोया जल्दी खराब होता है।
सवाल- त्योहारों के समय खोया में मिलावट का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- इस दौरान खोया और उससे बनने वाली मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है।
- डिमांड पूरी करने के लिए कम समय में बड़ी मात्रा में खोया तैयार और सप्लाई किया जाता है।
- मिलावटखोर लागत कम करने और ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसमें स्टार्च और अन्य सिंथेटिक चीजें मिलाते हैं।
- इस दौरान खोया बनाने, सप्लाई करने और बिक्री की गहन निगरानी करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मिलावटी खोया बाजार में पहुंचने का रिस्क बढ़ जाता है।

सवाल- खोया में किस तरह की मिलावट हो सकती है?
जवाब- इसमें सिंथेटिक दूध के साथ कई तरह की सस्ती, खराब चीजों की मिलावट हो सकती है। इनमें कुछ फूड आइटम्स होते हैं, जबकि कुछ केमिकल्स हो सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। डिटेल ग्राफिक में देखिए–

इनका चीजों का इस्तेमाल अलग-अलग मकसद से किया जाता है। पॉइंटर्स से थोड़ा विस्तार से समझिए-
- मिलावटी दूध- नकली खोया बनाने के लिए।
- स्टार्च या मैदा- मात्रा बढ़ाने के लिए।
- पाम ऑयल- लागत कम करने के लिए।
- डिटर्जेंट- गाढ़ा करने के लिए।
- टैल्कम पाउडर- रंग और टेक्सचर बदलने के लिए।
- हाइड्रोजन पेरॉक्साइड- जल्दी खराब होने से बचाने के लिए।
- सिंथेटिक रंग- ज्यादा आकर्षक दिखाने के लिए।
सवाल- इन चीजों की मिलावट सेहत के लिए कितनी खतरनाक है?
जवाब- इसका सेहत पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म मेें बुरा असर पड़ता है। ग्राफिक में सभी हेल्थ रिस्क देखिए-

सवाल- किन लोगों को हेल्थ रिस्क ज्यादा है?
जवाब- मिलावटी खोया हर किसी के लिए नुकसानदायक है, लेकिन कुछ लोगों में इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। किन्हें हेल्थ रिस्क ज्यादा होता है, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या घर पर खोया की शुद्धता जांची जा सकती है?
जवाब- घर पर खोया की शुद्धता का सटीक पता लगाना मुश्किल है। कुछ घरेलू तरीकों से मिलावट का शुरुआती अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन पुष्टि के लिए लैब टेस्ट जरूरी है।
सवाल- कौन-से घरेलू टेस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से भरोसेमंद नहीं हैं?
जवाब- सोशल मीडिया पर खोये की शुद्धता चेक करने के कई घरेलू तरीके बताए जाते हैं। हालांकि, इनमें से कई तरीकों को वैज्ञानिक रूप से भरोसेमंद नहीं माना जा सकता है। उदाहरण के लिए-
हथेली पर रगड़कर सूंघना
दावा किया जाता है कि असली खोये से घी जैसी खुशबू आती है। हालांकि, मिलावटखोर फ्लेवरिंग एजेंट्स मिलाकर इस स्मेल की नकल कर सकते हैं।
गोली बनाना या फटना
एक और दावे के मुताबिक, हथेली पर खोये की गोली बनाते समय उसमें दरारें पड़ें तो वह नकली है। लेकिन यह खोये में मौजूद नमी और उसे बनाने के तरीके पर भी निर्भर करता है।
चीनी के साथ गर्म करना
खोये को चीनी के साथ गर्म करने पर पानी निकलने को मिलावट का संकेत माना जाता है। जबकि तापमान, नमी और खोये की क्वालिटी के कारण भी ऐसा हो सकता है।
सवाल- मिलावट का पता लगाने वाले कौन-से टेस्ट वैज्ञानिक रूप से मान्य हैं?
जवाब- मिलावट की पहचान के लिए अलग-अलग लैब टेस्ट किए जाते हैं, जैसेकि-
टेस्ट-1: आयोडीन स्टार्च टेस्ट
- खोये के सैंपल में आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें डाली जाती हैं।
- अगर रंग नीला या काला हो जाए तो स्टार्च या मैदे की मिलावट है।
टेस्ट-2: डिटर्जेंट टेस्ट
- सैंपल को पानी में मिलाया जाता है। डिटर्जेंट मौजूद होने पर असामान्य झाग बनता है।
- लैब में इसकी पुष्टि विशेष केमिकल्स टेस्ट से भी की जाती है।
टेस्ट-3: यूरिया टेस्ट
- सैंपल में निर्धारित एजेंट मिलाए जाते हैं।
- रंग में बदलाव होने पर यूरिया की मौजूदगी का संकेत मिलता है।
सवाल- ये कैसे सुनिश्चित करें कि खोया मिलावटी न हो?
जवाब- इसका सबसे अच्छा तरीका है कि खोया घर पर बनाएं। अगर बाजार से खरीद रहे हैं तो भरोसेमंद दुकान से या भरोसेमंद ब्रांड का ही खरीदें। साथ ही रंग, स्मेल और बनावट में किसी तरह की असामान्यता दिखे तो न खरीदें।
सवाल- खोया का दूसरा सुरक्षित विकल्प क्या है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
मिल्क पाउडर और दूध
- मिल्क पाउडर में थोड़ा-थोड़ा गर्म दूध मिलाकर इसे मावे जैसी गाढ़ी और चिकनी बनावट दी जा सकती है।
- यह पेड़ा, बर्फी और लड्डू जैसी मिठाइयों में अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
इवैपोरेटेड मिल्क
- इसमें सामान्य दूध की तुलना में पानी कम होता है।
- इसे धीमी आंच पर गाढ़ा करके मिठाइयों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
फुल क्रीम दूध
- इसे धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाकर गाढ़ा किया जा सकता है।
- यह तरीका समय जरूर लेता है, लेकिन इससे खोये जैसा स्वाद और डेयरी फ्लेवर मिल सकता है।
सवाल- रक्षाबंधन पर मिठाई खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब- मिठाई खरीदते समय सिर्फ स्वाद नहीं, उसकी क्वालिटी और सेफ्टी पर भी ध्यान देना जरूरी है। ग्राफिक में सभी जरूरी सावधानियां देखिए –

सवाल- अगर मिलावटी खोया खा लिया है तो कौन-से लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें?
जवाब- इन स्थितियों में डॉक्टर से कंसल्ट करें-
- लगातार उल्टी हो रही हो।
- बार-बार दस्त आ रहे हों।
- पेट में तेज दर्द या ऐंठन हो।
- चक्कर आए या बहुत कमजोरी महसूस हो।
- शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के लक्षण दिखें।
- सांस लेने में दिक्कत या गंभीर एलर्जी हो।
- लक्षण 24-48 घंटे बाद भी बने रहें या बढ़ते जाएं।

रक्षाबंधन पर मिठाइयां सिर्फ स्वाद नहीं, रिश्तों की मिठास का भी प्रतीक होती हैं। इसलिए यह जानना उतना ही जरूरी है कि मिठाई किस चीज से बनी है, जितना यह कि वह कितनी स्वादिष्ट है। थोड़ी-सी जागरूकता रिस्क को कम कर सकती है और त्योहार को सुरक्षित बना सकती है।
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