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दुनियाभर में अनिद्रा और कम नींद की समस्या बढ़ रही है। इसके साथ ही लोग अच्छी नींद के लिए सप्लीमेंट और दवाओं पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि रोजाना नींद की गोलियों या सप्लीमेंट पर भरोसा करना सही नहीं है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी की नई रिपोर्ट के अनुसार, हर आठ में से एक अमेरिकी वयस्क सोने या नींद पूरी करने के लिए किसी सप्लीमेंट या दवा का इस्तेमाल करता है। वहीं एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि एक-तिहाई अमेरिकी वयस्क रात में न्यूनतम सात घंटे की नींद भी नहीं ले पाते। ड्यूक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के स्लीप साइंटिस्ट डॉ. सुजय कनसाग्रा के मुताबिक, कई लोग मेलाटोनिन और मैग्नीशियम जैसे सप्लीमेंट को जादुई उपाय मानते हैं, जबकि उन्हें अपनी नींद खराब होने के असली कारणों की जांच करानी चाहिए। उनका कहना है कि मैग्नीशियम के नींद सुधारने के प्रमाण सीमित हैं। हां, मांसपेशियों में खिंचाव या पैरों में ऐंठन वाले लोगों को इससे कुछ मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सप्लीमेंट पर निर्भरता कई बार असली बीमारी या समस्या को छिपा देती है। तनाव, देर रात तक स्क्रीन देखना, अनियमित दिनचर्या और काम का दबाव भी नींद खराब करने के बड़े कारण हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अच्छी नींद के लिए दवा से पहले बुनियादी आदतों पर ध्यान देना चाहिए-जैसे रोज एक ही समय पर सोना-जागना, सुबह धूप लेना, नियमित व्यायाम करना, सोने से पहले स्क्रीन से दूरी रखना और बेडरूम को अंधेरा व ठंडा रखना।
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