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आमने-सामने की बातचीत हमेशा कठिन ही होती है। हम इन महत्वपूर्ण वार्तालापों को कैसे संभालते हैं, यह हमारी प्रभावशीलता, टीम की मजबूती, इनोवेशन की निरंतरता, ग्राहक संबंधों की मजबूती और यहां तक कि शादी और दोस्ती के स्थायित्व को भी प्रभावित करता है। सफलता की सबसे बड़ी भविष्यवाणी यह है कि ऐसी बातचीत से पहले हम क्या करते हैं। कठिन बातचीत की तैयारी के यह चार तरीके हैं : 1) अपने उद्देश्य सही करें, उन्हें रीसेट करें
तनाव की स्थिति में हमारे उद्देश्य अल्पकालिक और स्वार्थी हो जाते हैं। हम इस बात को लेकर ज्यादा चिंतित रहते हैं कि हम अच्छे दिखें, सही साबित हों, जीतें या संघर्ष से बचें। सबसे पहले अपने उद्देश्य को रीसेट करें और लंबी अवधि पर ध्यान दें। अपने आप से पूछें : मैं वास्तव में क्या चाहता हूं? दूसरे व्यक्ति के लिए क्या बेहतर है? इस संबंध के लिए क्या सही है? अन्य हितधारकों के लिए क्या सबसे अच्छा है? 2) अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखें
कठिन बातचीत में हम अक्सर गुस्से या डर की स्थिति में चले जाते हैं। हमारी भावनाएं अक्सर वास्तविकता से अधिक अपनी धारणाओं और अनुभवों से प्रभावित होती हैं। भावनाओं को समझें और उन्हें नियंत्रण में रखें। अपने आप से पूछें कि आप इस स्थिति में अपनी भूमिका या जिम्मेदारी में किसे अनदेखा कर रहे हैं? एक समझदार, तर्कशील और सम्मानजनक व्यक्ति इस स्थिति में ऐसा क्या करेगा? एसा करने से आप बातचीत में शांत और निष्पक्ष बने रहेंगे और आपका दृष्टिकोण भी बदलेगा। 3) केवल बात नहीं, तथ्य इकट्ठा करें
किसी भी महत्वपूर्ण या कठिन बातचीत की शुरुआत केवल अपने निष्कर्ष या राय देने से नहीं करनी चाहिए। पहले उन तथ्यों और परिस्थितियों को इकट्ठा करें, जिनके आधार पर आप अपने निष्कर्ष तक पहुंचे हैं। अपने दृष्टिकोण को पेश करते समय धैर्य, ईमानदारी और सहजता बनाए रखें। तथ्य स्पष्ट होने से बातचीत में सामने वाला व्यक्ति आपकी बातों को समझने और स्वीकार करने में आसानी महसूस करता है। उदाहरण और सटीक जानकारी देने से आपकी दलील मजबूत होती है। 4) बातचीत में आपकी जिज्ञासा दिखनी चाहिए
बातचीत में आपका रवैया केवल आत्मविश्वास वाला न हो, उसमें जिज्ञासा भी शामिल हो। यह न केवल आपको खुला दिमाग रखने में मदद करता है, सामने वाले को अपनी बात साझा करने के लिए सहज बनाता है। जब आप गहराई से, ईमानदारी से और धैर्यपूर्वक सुनते हैं, तो सामने वाला व्यक्ति आपके प्रति कम प्रतिरोध दिखाता है और संवाद अधिक प्रभावी बनता है। जिज्ञासा के साथ सुनने से आप परिस्थिति की जटिलताओं को समझ पाते हैं, समाधान के करीब पहुंच पाते हैं।
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