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आयरलैंड के डेविड केओहान (47) ने जवानी के दिन शराब के हैंगओवर, स्मोकिंग और मोटापे में गुजारे, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को पूरी तरह बदल लिया। 32 की उम्र में एक सुबह उन्होंने स्पोर्ट्स शॉप से रनिंग शूज खरीदे। छह महीने में मैराथन पूरी की और अगले कुछ सालों में केतलीबेल खेल में वर्ल्ड चैम्पियन बन गए। कोविड में जब जिम बंद हुए, तब तीन बच्चों के पिता डेविड ने खुले समुद्र तटों और मैदानों में भारी पत्थर उठाने शुरू किए। इससे उन्हें मानसिक शांति मिली और जीवन को नया मकसद मिला। लॉकडाउन के दौरान डेविड ने 60 किलो के पत्थर को घर के बगीचे में उठाना शुरू किया। फिर एक दोस्त उनके घर 70-90 किलो के दो पत्थर छोड़ गया। इसके बाद डेविड ने जिम की मेंबरशिप नहीं ली। वे अकेले ही कई जगह जाकर पत्थरों को उठाते हैं। डेविड से प्रभावित होकर आम लोग उठा रहे पत्थर आइसलैंड में 23 से 154 किलो तक के भारी पत्थरों से कभी मछुआरों की ताकत और काम तय होता था। ‘इंडियाना स्टोन्स’ नाम से मशहूर डेविड ने इस परंपरा को फिर चर्चा में ला दिया। उनकी वजह से लोग आयरलैंड आकर पत्थर उठाने की चुनौती लेते हैं। डेविड किताब भी लिखते हैं। 171 किलो के ग्रेनाइट पत्थर से शुरू हुई खोज 2023 में डेविड ने अटलांटिक के इनिशमोर द्वीप पर 171.2 किलो का गीला, गुलाबी ग्रेनाइट पत्थर खोजा। उसे उठाने के लिए महीनों ट्रेनिंग की और 20 किलो वजन बढ़ाया। पहली सफलता के बाद वीकेंड पर खोज जारी रखी और अब तक 50 से ज्यादा ऐतिहासिक पत्थर ढूंढ चुके हैं। पत्थर उठाना ताकत नहीं, पुरानी संस्कृति का प्रमाण है डेविड को रिसर्च में समझ आया कि भारी पत्थर उठाना सिर्फ स्ट्रेंथ दिखाना नहीं है। इसका लंबा इतिहास रहा है। पुराने समय में इसे नौकरी के इंटरव्यू जैसा माना जाता था। तय वजन नहीं उठा पाए तो मछुआरा या राजमिस्त्री नहीं बन सकते थे। आयरलैंड में भी यह परंपरा थी, जो ब्रिटिश उपनिवेशवाद और अकाल के बाद खत्म हो गई। स्कॉटलैंड के ‘फियाना’ पत्थर के बारे में जानकर डेविड ने आयरिश परंपरा को फिर से खोजने का संकल्प लिया।
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