6 घंटे पहले
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थॉमस एल. फ्रीडमैन, तीन बार पुलित्ज़र अवॉर्ड विजेता एवं ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में स्तंभकार
निश्चित रूप से अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में कुछ ऐसा रहा होगा, जो अमेरिका के रियल-एस्टेट कारोबारी राष्ट्रपति को जाना-पहचाना लगा होगा। आखिरकार, यह किसी रियल-एस्टेट बैंक्रप्सी आवेदन जैसा ही लगता है- वित्तीय आत्मसमर्पण का एक दस्तावेज। यह इस बात का भी संकेत है कि ईरान ने ट्रम्प को किस हद तक दबाव में ला दिया था और किस तरह उसने उन्हें पूरी तरह से मात दी।
यह समझने के लिए आपको विदेश नीति विशेषज्ञ होने की जरूरत नहीं है कि इस मामले में क्या हुआ है। हां, इसके लिए आपका घरेलू राजनीति का जानकार होना जरूर अपेक्षित है। ट्रम्प ने युद्ध में अमेरिका के सहयोगी इजराइल और अरब देशों के हितों की कीमत पर पेंसिल्वेनिया, जॉर्जिया और मिशिगन जैसे निर्णायक राज्यों को प्राथमिकता दी।
ट्रम्प जानते थे कि युद्ध से पैदा हुई खाने-पीने की चीजों की महंगाई और पेट्रोल की ऊंची कीमतें मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकती थीं। उन्हें नवंबर तक कीमतें नीचे लाने के लिए युद्ध को तुरंत रोकना था, क्योंकि यदि डेमोक्रेट्स हाउस और सीनेट पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो ट्रम्प को इस बात की अंतहीन जांचों का सामना करना पड़ेगा कि उन्होंने राष्ट्रपति पद का उपयोग खुद को और अपने परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए कैसे किया। और संभवतः उन पर महाभियोग भी चलाया जा सकता है।
ऐसे में ट्रम्प ने वही किया जो वे हमेशा करते हैं : उन्होंने सभी सिद्धांतों और सहयोगियों को छोड़ दिया और अपने निजी हितों को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी मुश्किल स्थिति में डालने के लिए माहौल तैयार कर दिया। उन्होंने कहा, अगर यह सफल होता है, तो इसका श्रेय मैं लूंगा। अगर यह असफल होता है, तो मैं जेडी को दोष दूंगा। जेडी, तुम्हें सावधान रहना चाहिए। उनकी यह बात सुनकर लोग हंसे- लेकिन घबराहट के साथ, क्योंकि सभी जानते थे कि यह मजाक भी था और नहीं भी था।
इस समझौते ने ईरान को पहले से अधिक मजबूत तथा उसके सभी पड़ोसियों को तेहरान की इच्छाओं के प्रति अधिक असुरक्षित बना दिया है। ईरान जैसी जटिल समस्या से निपटने में ट्रम्प के तनावपूर्ण रवैये के प्रति मेरी सहानुभूति कहीं अधिक होती, अगर उन्होंने एक बार भी पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के प्रति ऐसा ही दृष्टिकोण दिखाया होता या यह स्वीकारा होता कि वे अब ईरानी लोगों के लिए वह सब नहीं कर सकते, जिसका उन्होंने वादा किया था। इसके बजाय वे बस ऐसा दिखावा करते हैं कि उन्होंने जो कुछ भी किया, वह पूरी तरह सही था।
यह डील न केवल ईरान के बम-ग्रेड यूरेनियम के निपटारे के सवाल को भविष्य की बातचीत के लिए टाल देता है, बल्कि आश्चर्यजनक रूप से यह इस संभावना को भी खुला छोड़ देता है कि भविष्य में ईरान उन जहाजों से शुल्क वसूल सकेगा, जो होर्मुज से गुजरना चाहते हैं। ईरान पर अरबों डॉलर के बम गिराने के बाद, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर तेहरान से होर्मुज के रास्ते 60 दिनों तक बिना शुल्क के आवागमन का आश्वासन भर हासिल कर पाए हैं। तेल टैंकरों के कप्तानो, अपने क्रेडिट कार्ड तैयार रखिए।
युद्धविराम समझौता ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक लगाने और लेबनान तथा इराक की सरकारों को कमजोर करने वाले उसके सहयोगी गुटों के समर्थन को सीमित करने पर चुप है। यह ईरान के परमाणु भविष्य पर होने वाली 60 दिनों की बातचीत को इस शर्त से भी जोड़ता है कि इजराइल लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ अपने सैन्य अभियान रोक दे।
अगर बराक ओबामा ने कभी ऐसा कोई समझौता किया होता, तो फॉक्स न्यूज अपनी नियमित प्रसारण सेवा रोककर इसकी निंदा करने लग जाता। आपको यह सवाल पूछना होगा कि ट्रम्प और नेतन्याहू इतना गलत आकलन कैसे कर सकते हैं कि उन्होंने सोच लिया 1979 से सत्ता में मौजूद किसी हुकूमत को केवल हवाई बमबारी के जरिए गिराया जा सकता है? दोनों के लिए इसका एक ही जवाब है : क्योंकि उन्होंने खुद को चापलूसों की फौज से घेर लिया है और अपनी पार्टियों से उन लोगों को बाहर कर दिया है, जो उन्हें चुनौती दे सकते थे।
ट्रम्प और नेतन्याहू इतना गलत आकलन कैसे कर सकते हैं कि उन्होंने सोच लिया 1979 से सत्ता में मौजूद किसी हुकूमत को केवल हवाई बमबारी के जरिए गिराया जा सकता है? जवाब है, क्योंकि उन्होंने खुद को चापलूसों की फौज से घेर लिया है। (द न्यूयॉर्क टाइम्स से)









