दादी-नानी वाले शौक’ बढ़ा रहे उम्र; वजह- दिमागी सक्रियता:  यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी का खुलासा; तनाव कम करने में ये हॉबी थेरेपी जैसी
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दादी-नानी वाले शौक’ बढ़ा रहे उम्र; वजह- दिमागी सक्रियता: यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी का खुलासा; तनाव कम करने में ये हॉबी थेरेपी जैसी

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वक्त के पहिए को थोड़ा पीछे घुमाइए। याद कीजिए अपनी दादी या नानी को, जो अक्सर सर्दियों की नम धूप में बैठकर स्वेटर बुनती थीं या आंगन में पौधों की देखभाल करती थीं। जिसे हम सभी ‘पुराना फैशन’ कहकर छोड़ चुके थे, विज्ञान अब उसे लंबी उम्र का सबसे कारगर नुस्खा बता रहा है। फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी के एक लंबे शोध में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जो महिलाएं सिलाई, बुनाई, क्रोशिया और बागवानी में व्यस्त रहती हैं, वे अन्य महिलाओं की तुलना में औसतन 8 साल ज्यादा जीवित रहती हैं। यह लंबी और सेहतमंद जिंदगी का ‘सिक्रेट कोड’ साबित हो रहा है। तनाव को ‘अनप्लग’ करती है बुनाई की लय शोधकर्ताओं के अनुसार, जब कोई महिला ऊन के फंदों को बुनती है या कपड़े सिलती है, तो उसके हाथों की लयबद्ध और दोहराव वाली हरकतें तंत्रिका तंत्र को शांत करती हैं। यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही होती है जैसे कोई ध्यान (मेडिटेशन) लगा रहा हो। इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ का स्तर गिरता है और खुशी देने वाले हार्मोन ‘डोपामाइन’ बढ़ता है। सरल शब्दों में कहें तो, जब सुई धागे में पिरोई जाती है, तो दिमाग बाहरी शोर से कटकर पूरी तरह एक बिंदु पर केंद्रित हो जाता है। क्रिएटिविटी दिमाग को ‘बूढ़ा’ होने से रोकती है मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सिलाई जैसे कामों में रंगों का चुनाव, गिनती रखना और डिजाइन तैयार करना दिमागी कसरत का काम करता है। इससे याद्दाश्त बेहतर होती है और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) का खतरा कम हो जाता है। जब कोई महिला खुद के हाथों से कोई चीज तैयार करती है, तो उससे मिलने वाली ‘सफलता की अनुभूति’ उनके आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर ले जाती है। सिलाई-बुनाई के दौरान होने वाली दोहराव वाली हरकतें दिमाग को ‘अल्फा स्टेट’ में ले जाती हैं, जो गहरे आराम की स्थिति है। बागवानी में एक बीज को पौधा बनते देखना जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया विकसित करता है। यह अकेलेपन का सबसे अच्छा इलाज है। व्यस्तता – योग जितना ही प्रभावी है घरेलू कामकाज में सक्रियता सिलाई, कढ़ाई, बुनाई और बागवानी का शौक जीवन में एक अनुशासन लाते हैं। घरेलू काम योग जितना ह प्रभावी है। इससे मानसिक स्पष्टता बनी रहती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक शौक एक तरह की ‘ऑक्युपेशनल थेरेपी’ हैं। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक अन्य अध्ययन में पाया गया था कि बुनाई करने से हृदय गति प्रति मिनट 11 धड़कन तक कम हो सकती है, जो शरीर को रिलैक्स मोड में डाल देती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘डिजिटल स्क्रीन की दुनिया में ये ‘एनालॉग शौक’ महिलाओं को भावनात्मक रूप से जमीन से जोड़े रखते हैं।’



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