दिल्ली हाईकोर्ट बोला- पत्नी प्रेग्नेंसी को ढाल नहीं बना सकती:  पहले के व्यवहार से पति को मानसिक प्रताड़ना हुई, पति को तलाक की परमिशन दी
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दिल्ली हाईकोर्ट बोला- पत्नी प्रेग्नेंसी को ढाल नहीं बना सकती: पहले के व्यवहार से पति को मानसिक प्रताड़ना हुई, पति को तलाक की परमिशन दी

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नई दिल्ली12 मिनट पहले

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फोटो AI जनरेटेड है। - Dainik Bhaskar

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दिल्ली हाईकोर्ट ने एक केस में पति को तलाक की परमिशन देते हुए कहा कि प्रेग्नेंसी को पति पर हुई क्रूरता के खिलाफ ढाल नहीं बनाया जा सकता है। कोर्ट ने माना कि पत्नी के व्यवहार से पति ने मानसिक प्रताड़ना झेली और इससे वैवाहिक संबंध भी पूरी तरह टूट गए।

हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस रेणु भटनागर की बेंच ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पति की तलाक याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि पति क्रूरता साबित नहीं कर सका।

साथ ही 2019 की शुरुआत में पत्नी का मिसकैरेज यह दिखाता है कि रिश्ते सामान्य थे। कोर्ट ने साफ कहा कि यह तय करने के लिए कि किसी के साथ क्रूरता हुई या नहीं, पूरे रिश्ते और सारी घटनाओं को देखा जाता है।

दरअसल मार्च 2016 में हुई शादी के बाद दंपती में लगातार विवाद रहे। पति ने 2021 में पत्नी के द्वारा क्रूरता का हवाला देते हुए तलाक की याचिका दाखिल की, जबकि पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न और घर से निकाल देने का आरोप लगाया था।

पति के आरोप और हाईकोर्ट की टिप्पणी

पति ने कोर्ट को बताया कि पत्नी ने उसे और उसकी मां को लगातार अपमानित किया। इसके अलावा वह स्वयं को नुकसान पहुंचाने की धमकियां देती थी और साथ रहने से इनकार करती थी। पत्नी कई बार बिना सही कारण के घर छोड़ चुकी है।

कोर्ट ने माना कि ये सभी व्यवहार मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आते हैं। बेंच ने कहा कि शादी का खत्म होना किसी की जीत या हार नहीं होता। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि रिश्ता ऐसी हालत में पहुंच चुका है कि उसे अब ठीक नहीं किया जा सकता।

आगे चलकर भले ही मेंटेनेंस या दूसरे मुद्दों पर मामले हों, दोनों पक्षों को शालीनता और सम्मान बनाए रखना चाहिए।

फैमिली कोर्ट ने तलाक की मंजूरी नहीं दी

फैमिली कोर्ट ने तलाक याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पति आरोप सिद्ध नहीं कर सका, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से साबित होता है कि दोनों के बीच वैवाहिक रिश्ते टूट चुके हैं।

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