दिल्ली हाईकोर्ट बोला-वकीलों का काम करना मुश्किल हो जाएगा:  CBI ने ईमेल से दस्तावेज भेजने पर ऑफिस बुलाया था; IO को पेश होने को कहा
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दिल्ली हाईकोर्ट बोला-वकीलों का काम करना मुश्किल हो जाएगा: CBI ने ईमेल से दस्तावेज भेजने पर ऑफिस बुलाया था; IO को पेश होने को कहा

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नई दिल्ली30 मिनट पहले

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दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों की स्वतंत्रता को लेकर एक मामले में शनिवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के एक वकील को जारी किए गए समन पर रोक लगा दी है। उक्त वकील ने अपने क्लाइंट की ओर से एजेंसी को एक ईमेल भेजा था।

कोर्ट ने कहा-

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इस नोटिस पर रोक लगा रहे हैं। जांच अधिकारी को कोर्ट में मौजूद रहने को कहें। यह कतई स्वीकार्य नहीं है। यदि ऐसी प्रथाएं जारी रहीं, तो वकीलों के लिए काम करना असंभव हो जाएगा।

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हाईकोर्ट ने कहा यदि इस तरह की कार्रवाई की अनुमति दी गई, तो यह कानूनी पेशेवरों के काम में गंभीर बाधा उत्पन्न करेगा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने नोटिस जारी किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की और जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।

क्या है मामला

  • सीबीआई ने 19 दिसंबर को एडवोकेट सचिन बाजपेई को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 और 179 के तहत नोटिस जारी किया।
  • नोटिस में उन्हें पेश होने, प्रमाणित दस्तावेज जमा करने और बयान देने को कहा गया था।
  • मामला ‘लॉर्ड महावीरा सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज एक केस से जुड़ा है।
  • याचिका में आरोप लगाया गया कि जब कंपनी का एक कर्मचारी दस्तावेज देने सीबीआई कार्यालय गया, तो उसे घंटों हिरासत में रखा गया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
  • इसके विरोध में एडवोकेट बाजपेई ने 15 दिसंबर को अपने क्लाइंट के निर्देश पर ईमेल के जरिए दस्तावेज भेजे और बाद में क्लाइंट को अग्रिम जमानत भी दिलाई। इसके ठीक दो दिन बाद सीबीआई ने वकील को ही समन भेज दिया।

वकील-क्लाइंट के विशेषाधिकार का हनन

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वकीलों को केवल अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करने के लिए संदिग्ध नहीं माना जा सकता और न ही उन पर दबाव बनाया जा सकता है।

यह वकील और क्लाइंट के बीच के गोपनीय संबंधों का उल्लंघन है। अदालत अब इस मामले पर 23 दिसंबर को आगे की सुनवाई करेगी।

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