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लगभग पूरा देश हीटवेव की चपेट में है। पश्चिम राजस्थान के फलोदी में तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है, वहीं मध्य भारत के भोपाल में भी गुरुवार को तापमान 43 डिग्री से अधिक रहा। ऐसे में स्वाभाविक है कि हम किसी ठंडी चीज की ओर भागते हैं- जैसे आइसक्रीम और योगर्ट। लेकिन आप हेल्थ को लेकर सजग हैं और मानते हैं कि योगर्ट, आइसक्रीम से बेहतर है तो मैं आपको ‘ईट योर आइसक्रीम’ किताब पढ़ने की सलाह दूंगा। इसे शेल्फ में रखी बहुत-सी किताबों में से एक मान कर खारिज मत करें। इसे डॉ. एजेकील इमैनुएल ने लिखा है। वे अमेरिकी ऑन्कोलॉजिस्ट और यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया में सीनियर प्रोफेसर हैं, हेल्थ पॉलिसी और बायोएथिक्स के विश्वस्तरीय विशेषज्ञ हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल के विशेष सलाहकार हैं और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के प्रशासन में प्रमुख हेल्थ पॉलिसी एडवाइजर रह चुके हैं। उनके सीवी की सबसे अहम बात है कि वे विज्ञान से जुड़े इंसान हैं। इमैनुएल हेल्दी फैट्स, फाइबर, फर्मेंटेड फूड्स, सीमित मात्रा में प्रोटीन और घर के खाने की तारीफ करते हैं। उनकी किताब का शीर्षक उस रिसर्च को सम्मान देता है, जिसमें पाया गया कि बिना प्रिजर्वेटिव और इमल्सीफायर वाली अच्छी गुणवत्ता की आइसक्रीम खाने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा घट सकता है। 2014 में हार्वर्ड की 1.50 लाख से ज्यादा लोगों पर स्टडी में पाया गया कि योगर्ट और आइसक्रीम ने टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कम किया। इमैनुएल कहते हैं कि ‘रिसर्चर्स ने तो यहां तक पाया कि टाइप-2 डायबिटीज की रोकथाम में आइसक्रीम योगर्ट से ज्यादा असरदार है।’ इमैनुएल कहते हैं कि वे तेजी से बढ़ रहे वेलनेस के अजीबोगरीब तरीकों और उन्हें बेचने वाले नीम-हकीमों से बेहद परेशान हो चुके हैं। वे चूहों के ऊपर एक्सपेरिमेंट की हुई और इंसानों द्वारा इस्तेमाल की जा रही गोलियां खरीदने वालों से पूछते हैं कि ‘क्या आपके पास पूंछ और विसकर्स हैं, जो आप यह खा रहे हैं?’ हममें से ज्यादातर हेल्थ को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचते हैं- इस विषय पर दुनिया के बहुत से लोग उनके सलाह मांगते हैं। जब लोग उनसे पूछते हैं कि वे कौन-सी डाइट लेते हैं तो उनका जवाब होता है कि ‘मैं बस आम इंसान की तरह खाना खाता हूं।’ उनकी नई किताब ‘ईट योर आइसक्रीम : सिक्स सिंपल रूल्स फॉर लॉन्ग एंड हेल्दी लाइफ’ कहती है कि वेलनेस का मतलब अंतहीन अभावों का सिलसिला नहीं होना चाहिए, न इसमें आपका सारा समय और पैसा खपना चाहिए। वे स्वास्थ्य बेहतर रखने वाली निम्न आदतें अपनाने और प्रसन्नता से जीने की सलाह देते हैं। 1. बेवकूफ मत बनें : ये स्पष्ट निर्देश कहता है कि जानबूझकर गंभीर नुकसान उठाने के जोखिम से बचें। इस सूची में स्मोकिंग, वेपिंग, शराब पीना, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना, ड्राइविंग के दौरान मैसेजिंग, छुट्टियां न लेना, कैंसर स्क्रीनिंग टालना शामिल है।
2. बात कीजिए : वेलनेस, लंबी उम्र और खुशी के लिए परिवार, दोस्त और सामाजिक मेल-मिलाप सबसे जरूरी चीजें हैं। वे कहते हैं कि अनजान लोगों से भी बात कीजिए।
3. दिमाग से शार्प रहें : उनकी दो शब्दों की सलाह है- ‘डोन्ट रिटायर।’ अगर नौकरी से रिटायर हो गए हैं तो घर पर ज्यादा काम करें। क्योंकि खाली बैठना कॉग्निटिव क्षमता को प्रभावित करता है। हालांकि मानसिक क्षमता काफी हद तक जीन्स पर निर्भर है, लेकिन जब लोग काम छोड़ देते हैं तो लाइफस्टाइल का फर्क भी पड़ता है। वे कहते हैं कि ‘रिटायरमेंट के बाद खुद को टीवी और बैठे रहने वाली जिंदगी तक सीमित मत कीजिए।’
4. आइसक्रीम खाएं : डेयरी प्रोडक्ट्स, खासकर आइसक्रीम के फायदों को लेकर संकेत मजबूत हैं। वे कहते हैं, ‘सेल्फ पनिशमेंट मॉडल’ जीवन के लिए खराब तरीका है।
5. चलते-फिरते रहें : भले आप नियमित एक्सरसाइज न करें, लेकिन वॉक, साइकिलिंग करते रहिए। जंगल में लंबी वॉक पर जाइए। इमैनुएल खुद साइकिलिंग और योग करते हैं। 6. नींद को महत्व दें : सोने के लिए सही माहौल बनाएं। रात 10:30 बजे तक सोना अच्छा है। सोने से एक घंटा पहले तक किताब पढ़ें और फोन या टीवी देखना बंद करें। फंडा यह है कि यदि आपके पूर्वज 90 साल तक स्वस्थ रहे हैं तो सेहतमंद जीवन जीने के लिए बस उनके कदमों पर चलिए।
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