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- 3 Stories Of Goddess Durga, Navratri 2025, Goddess Durga And Mahishasur Story In Hindi, Life Management Tips Of Goddess Durga
12 घंटे पहले
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अभी नवरात्रि चल रही है और देवी पूजा का ये उत्सव 1 अक्टूबर को महानवमी के साथ खत्म होगा। इन दिनों में देवी पूजा और मंत्र जप के साथ ही देवी दुर्गा की कथाएं पढ़ने-सुनने की भी परंपरा है। माना जाता है कि देवी कथाओं को पढ़ने और कथाओं की सीख को जीवन में उतारने से हमारी सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। जानिए देवी दुर्गा से जुड़ी 3 कथाएं, इन कथाओं का जिक्र दुर्गा सप्तसती में भी है।
महिषासुरमर्दिनी – देवी दुर्गा और महिषासुर का युद्ध
बहुत समय पहले महिषासुर नामक असुर ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वर प्राप्त किया था कि कोई पुरुष उसका वध नहीं कर सकेगा। वर पाकर उसका अहंकार बढ़ गया और उसने तीनों लोकों में आतंक फैलाना शुरू कर दिया। स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, इंद्र और देवताओं को पराजित कर दिया।
पराजित देवता ब्रह्मा, विष्णु और महादेव के पास पहुंचे। तीनों ने अपने तेज से एक देवी को प्रकट किया, ये देवी हैं दुर्गा, एक महान शक्ति, जो सभी देवताओं के तेज से उत्पन्न हुई थीं। सभी देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र दिए।
महिषासुर ने अपने सेनापतियों को भेजा- चिक्षुर, चामर, उध्दत। देवी ने इन सभी को पराजित कर दिया। अंत में स्वयं महिषासुर युद्ध में उतरा। वह कभी भैंस, कभी हाथी, कभी सिंह का रूप लेकर युद्ध करता रहा।
देवी और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक भयंकर युद्ध चला, दसवें दिन देवी ने महिषासुर को उसके भैंस रूप में त्रिशूल से भेदकर उसका वध कर दिया।
देवी की सीख
जब अधर्म बढ़ जाता है, तब शक्ति यानी देवी प्रकट होती हैं और धर्म की स्थापना करती हैं।
- दूसरी कथा
कौशिकी देवी के अवतरण की कथा
देवी पार्वती हिमालय पर तप कर रही थीं। वहीं, देवताओं की प्रार्थना पर उनके शरीर से एक अत्यंत तेजस्वी शक्ति निकली, ये शक्ति इतनी सुंदर थी कि चारों ओर प्रकाश फैल गया। इस शक्ति को ही कौशिकी देवी कहा गया, जो बाद में चंड-मुंड, रक्तबीज, और शुंभ-निशुंभ का वध करती हैं।
कौशिकी देवी का प्रकट होना यह दर्शाता है कि सच्ची शक्ति भीतर से आती है- वह शरीर से नहीं, आत्मा से उत्पन्न होती है।
देवी की सीख
जब तक हम अपनी भीतरी शक्ति को नहीं पहचानते हैं, तब तक हम असुरों यानी अहंकार, मोह, लोभ से मुक्त नहीं हो सकते हैं।
- तीसरी कथा
राजा सुरथ और वैश्य समाधिक की कथा
राजा सुरथ एक न्यायप्रिय राजा थे, लेकिन अपने ही मंत्रियों से धोखा खाकर राज्य से निष्कासित कर दिए गए। वे जंगल में पहुंचे। वहां एक वैश्य था – समाधिक। समाधिक व्यापार में धोखा खाकर घर से निकाला गया था।
दोनों दुःखी थे, लेकिन उन्हें अपने राज्य, परिवार और संपत्ति की चिंता बनी रहती थी। वे ऋषि मेधा के पास पहुंचे और प्रश्न किया कि हमें मोह क्यों हो रहा है, जबकि हमें सब कुछ त्याग देना चाहिए?
ऋषि मेधा ने उत्तर दिया कि ये सब माया है– देवी की शक्ति है। आपको देवी की भक्ति करनी चाहिए। तभी आप इस मोह-माया से दूर हो सकते हैं।
ऋषि मेधा ने इन दोनों को देवी दुर्गा की महिमा सुनाई और उपदेश दिया कि सच्चे भाव से देवी की उपासना करें।
मेधा जी की बातें मानकर इन दोनों ने मां दुर्गा की कठोर तपस्या की। इनके तप से देवी प्रसन्न हुईं और राजा सुरथ को राज्य वापस मिल गया। समाधिक को आत्मज्ञान की प्राप्त हुई।
प्रसंग की सीख
जीवन में जब संकट आएं, तब भक्ति को नहीं छोड़ना चाहिए। भक्ति से ही मुश्किलों को दूर करने की शक्ति मिलती है।








