पाकिस्तान में सियासी माहौल गरमा रहा है। चैम्पियंस ट्रॉफी के उद्घाटन से कुछ ही दिन पहले वकीलों ने 10 फरवरी से सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का एलान कर दिया है। वकील इस्लामाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विवादास्पद न्यायाधीशों की नियुक्तियों का वि
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पत्रकार पहले से ही सोशल मीडिया नियमन संबंधी नए कानून के खिलाफ हैं। अब विपक्षी दल भी शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ एक नए राजनीतिक गठबंधन की घोषणा करने की तैयारी में हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ।
एक ओर जहां पाकिस्तान की राजनीति उबाल पर है, वहीं दूसरी ओर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भी बढ़ रहा है। पिछले महीने भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपनी वार्षिक आर्मी डे प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने का पाकिस्तान पर आरोप लगाया था।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ दिन बाद ही प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पाक-अधिकृत कश्मीर के भिंबर पहुंचे और भारतीय सेना प्रमुख की इस टिप्पणी को खारिज कर दिया था।
इस्लामाबाद के राजनयिक हलकों में भारत और पाकिस्तान के बीच अचानक बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर चिंता देखी जा रही है। कुछ महीने पहले ही भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस्लामाबाद में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे और प्रस्थान से पहले उन्होंने पाकिस्तानी मेजबानों की मेहमाननवाजी की तारीफ भी की थी।
लेकिन अक्टूबर 2024 और फरवरी 2025 के बीच ऐसा क्या हुआ जो हालात इतने बिगड़ गए? एक यूरोपीय राजनयिक ने मुझे बताया कि भारतीय पक्ष वास्तव में जम्मू-कश्मीर में अपने सुरक्षा बलों पर बढ़ते हमलों को लेकर चिंतित है, जबकि इस्लामाबाद भारत पर पाकिस्तान में चीनी नागरिकों पर हो रहे हमलों को प्रायोजित करने का आरोप लगा रहा है।
दक्षिण एशिया के दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने कश्मीर को लेकर तीन बड़े और एक छोटा युद्ध (कारगिल) लड़ा है। कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के कई प्रस्ताव मौजूद हैं, लेकिन यह विवाद अब तक हल नहीं हो सका है। क्या ये दो परमाणु शक्ति संपन्न देश इस विवाद को एक और युद्ध के जरिए सुलझा सकते हैं? इसका उत्तर एक बड़ा “नहीं’ है। तो फिर ये दोनों देश शांति वार्ता शुरू करने के लिए तैयार क्यों नहीं हैं?
फरवरी के पहले सप्ताह में शहबाज शरीफ सरकार ने कश्मीर से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए। कुछ लोगों का मानना है कि शरीफ पाकिस्तान में चल रहे राजनीतिक संकट से ध्यान भटकाने के लिए “कश्मीर कार्ड’ खेल रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि इस समय ऐसा करना गलत है, क्योंकि चैम्पियंस ट्रॉफी शुरू होने वाली है।
भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान में नहीं बल्कि यूएई में अपने मैच खेलेगी। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा तो लाहौर में होने वाले उद्घाटन समारोह में भी शामिल नहीं हो रहे हैं।
रोहित शर्मा को लाहौर आमंत्रित करने की कोशिश करने के बजाय शहबाज शरीफ सरकार ने 3 और 5 फरवरी को पूरे पाकिस्तान में भारत विरोधी रैलियां और सेमिनार आयोजित कराए।
इन रैलियों में ज्यादातर सत्तारूढ़ दल के समर्थक ही शामिल हुए। पाकिस्तान में रहने वाले अधिकांश कश्मीरी इस समय काफी निराश हैं। उन्होंने पाक-अधिकृत कश्मीर में लागू किए गए नए दमनकारी कानूनों का विरोध किया, जो सभाओं और अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाते हैं।
मैं हाल ही में लंदन में ब्रिटिश संसद के कुछ सदस्यों से मिला, जो अपने मतदाताओं के दबाव में “स्वतंत्र कश्मीर’ अभियान का समर्थन करने पर विचार कर रहे हैं। ये सांसद भारत और पाकिस्तान के कश्मीरी बुद्धिजीवियों के संपर्क में हैं।
अगर ब्रिटिश सांसदों के इस अभियान में यूरोपीय संसद और अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्य भी शामिल हो जाते हैं तो भारत और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया क्या होगी?
युद्ध भड़काने वालों के हाथों में खेलने और पश्चिमी देशों को कश्मीर विवाद में दखल देने का मौका देने के बजाय इन दोनों परमाणु शक्तियों को परिपक्वता दिखानी चाहिए और शांति वार्ता शुरू करनी चाहिए।
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