पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  कम से कम कथा या प्रवचन को मोबाइल पर ना सुनिए
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: कम से कम कथा या प्रवचन को मोबाइल पर ना सुनिए

Spread the love


  • Hindi News
  • Opinion
  • Pt. Vijayshankar Mehta’s Column At Least Don’t Listen To The Story Or Sermon On Mobile

5 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

चांदनी घर जलाने आई है। इसका सीधा मतलब है, मोबाइल की रोशनी अब हमारे जीवन में नुकसान के दूसरे चरण में चल रही है। स्ट्रीमिंग के दौर में सबकुछ लोग हथेली पर कर रहे हैं। हमारा विषय है कम से कम कथा, प्रवचन मोबाइल या अन्य डिजिटल माध्यम पर ना सुनिए। इसके लिए लाइव ही अच्छा है।

अब तो न्यूरोसाइंटिस्ट भी मानते हैं कि आंखें दृश्यों को मस्तिष्क में ले जाती हैं और अमिग्डाला- यानी मस्तिष्क का वो भाग, जहां से भावना, संवेदना जागती है- उसको प्रभावित करती है। ये काम आंख करती है। लाइव कथा सुनने से भावना, संवेदना, धैर्य, समझ और चरित्र सब आपकी पकड़ में आ जाते हैं।

यदि आप यही सबकुछ मोबाइल या टीवी के परदे से सुन रहे हैं, तो उसका असर लाइव के मुकाबले कमजोर होगा। आंखें ठोकर पहले खाती हैं, उसके बाद पैर लड़खड़ाते हैं। तो आंख बड़ी महत्वपूर्ण है। कोशिश करिए कि महीने में एक बार कुछ ना कुछ लाइव जाकर सुनिए। रूबरू होकर ज्ञान मिलना अलग प्रभाव देगा।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *