पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  ईर्ष्या, जलन और द्वेष के कारणों को समझना जरूरी
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: ईर्ष्या, जलन और द्वेष के कारणों को समझना जरूरी

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  • Column By Pandit Vijay Shankar Mehta It Is Important To Understand The Reasons Behind Jealousy, Envy And Hatred

7 घंटे पहले

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पं. विजय शंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजय शंकर मेहता

किसी और को जो उपलब्धि हो जाए और यदि वही हमें न हो पाए, तो उसे ईर्ष्या कहते हैं। किसी और को उपलब्धि प्राप्त हो और वैसी ही उपलब्धि हमारे पास पहले से हो, तो उसे जलन कहते हैं। जलन में यह चिंता होती है कि सामने वाले को उपलब्धि हो गई, अब हमारी उपलब्धि कहीं कम न हो जाए।

ईर्ष्या और जलन मिलकर एक नई स्थिति को जन्म देते हैं, जिसे द्वेष कहते हैं- हर एक से असहमत होना, हर बात का नकारात्मक पहलू देखना। महाभारत में दुर्योधन ईर्ष्या का प्रतीक था, शकुनि में जलन भरी थी और कर्ण द्वेष से पीड़ित था। इन तीनों ने मिलकर महाभारत कराई।

इन तीन बातों को भड़काने वाली हमारे भीतर दो वृत्तियां होती हैं- 50 प्रतिशत अहंकार और 50 प्रतिशत उदासी। ये दोनों वृत्तियां इन तीनों को हमारे भीतर उजागर करती हैं। ऐसे में दो काम किए जा सकते हैं- अपने लिए जो खुशखबर है, उसे पहले जीएं। बहुत अधिक प्रचार-प्रसार न करें। और दूसरे की जो खुशखबर है, उसे बहुत अच्छे से स्वीकार करें।

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