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- Pt. Vijayshankar Mehta Column: Meditation For Childrens Mental Health
28 मिनट पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
आज माता-पिता अपने बच्चों की मेंटल हेल्थ को लेकर बड़े परेशान हैं। पूरी दुनिया में भारत के युवा सबसे ज्यादा करियर ओरिएंटेड माने जाते हैं। तो भविष्य के प्रति यह गंभीरता तो युवा पीढ़ी में है, लेकिन जब यह बचपन युवा होगा, तब क्या होगा?
ऐसा कहते हैं कि इच्छा की यात्रा पर निकले हुए व्यक्ति अपनी नींद खो देते हैं। इच्छा रखना मनुष्य का स्वभाव है। फिर इच्छा लालसा में बदलती है। लालसा वासना में तब्दील होती है और वासना फिर परेशान करती है।
पहले युवा लोग बहुत जल्दी प्रतिक्रिया देते थे। लेकिन अब बच्चे भी ऐसा करने लग गए हैं। एक्शन में उतनी ऊर्जा नहीं लगती, जितनी रिएक्शन में खर्च हो जाती है। मनुष्य के मन में एक चुम्बक होता है। हम जो सोचते हैं, उस परिस्थिति को वो खींचता है।
आज बचपन जो सोच रहा है, उसकी जरूरत उस उम्र में नहीं है। और उम्र से पहले ही कुछ बातें यदि मन में उतर जाएं तो उसकी प्रतिक्रिया खतरनाक ही होती है। बच्चों की मेंटल हेल्थ को यदि ठीक रखना है तो समय रहते उनको मेडिटेशन से जरूर जोड़ा जाए।








