पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अपने घर में सहज स्वभाव की जीवन-शैली अपनाएं
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने घर में सहज स्वभाव की जीवन-शैली अपनाएं

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2 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

व्यावसायिक जीवन में कुछ लोग कहते हैं कि प्रतिस्पर्धा ऐसे करनी चाहिए, जैसे युद्ध लड़ा जा रहा हो। आज गलाकाट स्पर्धा का समय है। जिस लक्ष्य को आप पाना चाहते हैं, आप ही की तरह या आपसे अधिक योग्य लोग भी उस लक्ष्य की ओर दौड़ रहे हैं। तो युद्ध जैसा माहौल होना ही है। अब घरों में भी ऐसा होने लगा है। घर के सदस्य आपस में ही प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं।

चूंकि लोग बाहर की दुनिया से युद्ध सीख लेते हैं, तो युद्ध के तौर-तरीके घर में अपनाने लगते हैं। घर में झगड़ा तो हो सकता है, पर युद्ध नहीं होना चाहिए। श्रीराम को जब विश्वामित्र जी ने कहा कि सीता स्वयंवर में धनुष तोड़ने के लिए अब राम तुम उठो तो ऐसा लिखा गया है- ‘ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएं।’ सहज स्वभाव से राम खड़े हुए।

यह जो सहज स्वभाव है, ये ऐसी जीवन-शैली है, जिसे घर में अपनाएं तो हम एक बात समझ जाएंगे- अपनापन क्या होता है। एक छत के नीचे रहने वालों में करुणा, प्रेम, सहानुभूति- ये मूल्यों की तरह उतरना चाहिए। घर में छोटे-मोटे झगड़े तो रुकेंगे नहीं, पर युद्ध जरूर रोका जा सकता है।

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