पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  दुनिया पर विचार और भगवान पर विश्वास करें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: दुनिया पर विचार और भगवान पर विश्वास करें

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इस समय एक बड़ा भ्रम चल रहा है, वो ये कि हम दुनिया पर विश्वास करते हैं और भगवान पर विचार करते हैं। आज जो कुछ भी हमारे आसपास हो रहा है, खासतौर पर विज्ञान और तकनीक के मामले में- उस पर हम आंख मूंदकर विश्वास कर रहे हैं। और भगवान है कि नहीं है, कृपा करता भी है या नहीं, इस पर बहुत विचार करते हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिक अपनी ही खोज के खतरों के लिए कहते हैं कि विज्ञान जिम्मेदार हाथों में सुरक्षित रहेगा, अन्यथा नुकसान पहुंचाएगा। पर जिम्मेदार कौन है? जिसको देखो वही दुरुपयोग करने में लगा है। आजकल तो परिवार के विचार को भी लोग अपनी व्यक्तिगत खुशी में रोड़ा मानते हैं। पहले परिवार में रहने का मतलब था स्थायी रिश्ते और स्थायी जिम्मेदारी, अब चारों तरफ गैर-जिम्मेदारी का वातावरण बन गया है। घर के बाहर सरकारों ने दान दे-देकर गैर-जिम्मेदारों की फौज खड़ी कर दी और घर के भीतर संस्कारों के अभाव में सदस्य गैर-जिम्मेदार हो गए। और दोनों का मजा विज्ञान और तकनीक ले रहे हैं।



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