पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  भगवान को ढूंढा और दुनिया की वस्तुओं को खोजा जाए
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: भगवान को ढूंढा और दुनिया की वस्तुओं को खोजा जाए

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5 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

ढूंढना और खोजना, दो अलग-अलग बातें हैं। ढूंढा उसे जाता है, जो पहले से प्राप्त हो और आप कहीं रखकर भूल गए। खोजा उसे जाता है, जो अप्राप्त हो। इसलिए भगवान को ढूंढा जाए और दुनिया की वस्तुओं को खोजा जाए। क्योंकि परमात्मा की प्राप्ति, प्राप्त की ही प्राप्ति है और संसार की वस्तुएं अप्राप्त की प्राप्ति हैं। आजकल एआई के माध्यम से अप्राप्त की प्राप्ति बहुत आसान हो गई।

इसका जन्म कोई आज नहीं हुआ। लगभग 75 साल पहले एलन ट्यूरिंग ने दिमाग वाली मशीन बना दी थी और उसी के माध्यम से द्वितीय विश्व युद्ध में हिटलर को हराया गया। दुनिया के देश जान चुके हैं कि एआई के जो फायदे होंगे वो अपनी जगह, पर जो नुकसान है- वह बहुत बड़ा विस्फोट होगा।

हमें एक निजी अनुशासन बना लेना चाहिए कि हम किस सीमा तक इस भस्मासुर का सदुपयोग करें। और उसके बाद एक लक्ष्मण रेखा खींच ली जाए कि न तो यह रावण अंदर आ सके और न ही हमारी शांति, शक्ति और भक्ति रूपी सीता बाहर जा सके।

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