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शांति के मामले में धर्म और विज्ञान एक जगह पर सहमत हैं और वो ये कि मन पर काम किया जाए। विज्ञान कहता है माइंडसेट अगर ठीक है तो विपरीत परिस्थिति में भी आप शांत रह सकेंगे। यही बात धर्म भी अपने ढंग से कहता है। जब कथा सुना रहे थे गरुड़ जी को काकभुशुंडि तो तुलसी लिखते हैं- प्रभु अवतार कथा पुनि गाई, तब सिसु चरित कहेसि मन लाई। प्रभु के अवतार की कथा का वर्णन किया, उसके बाद मन लगाकर राम जी की बाल लीलाएं कहीं। ये जो मन लगाकर शब्द है, इसका अर्थ यह है कि मन को एकाग्र करें, नियंत्रित करें और तब कोई काम करें। पिछले दिनों दुनिया ने दिल्ली आकर एआई पर चिंतन किया। लेकिन जो एआई के जानकार हैं, जिनके पास थोड़ी भी आध्यात्मिक समझ है, उन्होंने यह बात अवश्य कही कि मन को नियंत्रित करके आत्मा तक जाया जाए तो एआई के नुकसान नहीं होंगे। अभी तो दुनिया के जिम्मेदार लोग एआई को कंधे पर लेकर चल रहे हैं और उन्हें भी समझ नहीं आ रहा कि यह पालकी है या अर्थी?
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