पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  हमें यह सीखना चाहिए कि संतत्व का मजाक न बनाएं
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हमें यह सीखना चाहिए कि संतत्व का मजाक न बनाएं

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5 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

समाज का आचरण इन दिनों ऐसा हो गया है कि साधु को अत्यधिक सावधानी रखनी पड़ेगी। धर्म में राजनीति आएगी तो राजनीति के दोष भी आएंगे। लेकिन जब भी ऐसा हो तो हम सामान्य लोगों को एक बात सीखनी चाहिए कि संतत्व का मजाक न बनाएं। क्योंकि ये संत ही हैं, जिन्होंने सत्ता को समय-समय पर समझाया, लेकिन राजनीति में रुचि नहीं ली।

वशिष्ठ जी ने 21 दिन लगातार श्रीराम को सत्ता के स्वाद में वैराग्य कैसे बना रहे, ये समझाया था। इसे ही योग वशिष्ठ कहते हैं। ऐसे कठिन समय में परमात्मा के प्रति भरोसा और बढ़ाइए। समाज, साधु, सत्ता- इनके संबंधों पर बहुत अधिक विचलित ना हों हम लोग। समय तो अभी और अलग-अलग दृश्य दिखाएगा।

परमात्मा जीवन में हो तो वो लाभ मिलता है, जो पांडवों को मिला। द्रोण ने कौरव-पांडव, दोनों को ही शस्त्र चलाना सिखाया, लेकिन श्रीकृष्ण ने युद्ध का अर्थ समझाया। तो केवल शस्त्र से काम नहीं चलेगा, युद्ध के मनोविज्ञान को समझना पड़ेगा। इसलिए हम किसी भी क्षेत्र के व्यक्ति हों, युद्ध को समझे बिना शस्त्र ना उठा लें।

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