पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  सच्चे अनुभव के लिए अतीत का भी समुद्र-मंथन करें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: सच्चे अनुभव के लिए अतीत का भी समुद्र-मंथन करें

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9 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

बीते जीवन को परत-दर-परत उघाड़ने का भी समय निकाला जाए। विज्ञान और तकनीक के युग में वक्त तेजी से बदल रहा है। इंसान दौड़ रहा है। लेकिन सच्चे अनुभव के लिए अतीत का भी समुद्र-मंथन किया जाना चाहिए। क्योंकि जीवन घटनाओं से सतत बदलता है। हर बदले दौर में हमारी भूमिका भी वैसी ही होनी चाहिए।

हमारे यहां अवतार-व्यवस्था इसीलिए रखी गई। राम ने रणांगन पर काम किया। लंका गए रावण को मारने। कृष्ण ने रणनीति पर काम किया। राम दशरथ के आंगन में उतरे। कृष्ण नंद के प्रांगण में खेले। और दोनों की भूमिकाएं एक युग के बाद बदली-बदली-सी थीं।

हैं दोनों विष्णु के ही अवतार। राम को अपनी ही केकैयी ने वनवास में भेजा, कृष्ण को अपने ही कंस को मारना पड़ा। दोनों समय स्थितियां बदली हुई थीं। हम मनुष्य तो चौबीस घंटे में चारों युग से गुजरते हैं। कालचक्र हमारे आसपास घूमता रहता है। इसलिए अपने मनुष्य होने को परिपक्वता में सोचें और एक ही दिन के चार कालखण्डों में अपनी भूमिकाएं तय करें।

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