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मनुष्य होने के लिए कर्म नहीं, सृजन करना पड़ता है। यदि आपने शरीर से आत्मा तक की यात्रा नहीं की तो आप मनुष्य हो भी नहीं पाएंगे। श्रीराम ने छह सूत्र दिए थे काकभुशुंडि को, जो आत्मा तक जाने के लिए बूस्टर हो जाते हैं। श्रीराम ने कहा था- भगति ग्यान विज्ञान बिरागा, जोग चरित्र रहस्य बिभागा। जानब ते सबही कर भेदा, मम प्रसाद नहिं साधन खेदा। यानी, भक्ति, ज्ञान, विज्ञान, वैराग्य, योग, मेरी लीलाएं और उनके रहस्य तथा विभाग- इन सबके भेद को तू मेरी कृपा से ही जान जाएगा। तुझे साधन का कष्ट नहीं होगा। अब यहां श्रीराम ने छह बातें बोली हैं- भक्ति, ज्ञान, विज्ञान, वैराग्य, योग और मेरी लीला के रहस्य। यह सारे शुभ गुण हैं, जो ईश्वर कृपा से मनुष्य को मिलते हैं। और सबसे बड़ी बात राम कहते हैं साधन के कष्ट नहीं होंगे। यह जो दुनियादारी की चीजें हम अपने आसपास इकट्ठी कर लेते हैं, इनकी भी तकलीफ है। लेकिन यह छह शुभ गुण हों तो हम दुनिया में रहेंगे, आनंद भी उठाएंगे पर दुनिया के दु:ख हमें परेशान नहीं कर पाएंगे।
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