टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: इस बार दीपावली पर ‘ग्रोथ’ और ‘गिविंग’ एक साथ चलें

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इस वर्ष प्रकाश पर्व पर एक विचार किया जाए। हम दीयों को पूजते हैं। दीये कभी शोर नहीं करते। पर उस दीये को प्रज्वलित करने वाले भरपूर शोर और धुआं इस रात प्रकृति को दे देते हैं। वो दीप प्रज्वलित करने वाले लोग हम ही हैं। अब यहां सोचें किस प्रकाश की बात हम कर रहे हैं? दुनिया का सबसे सुंदर प्रकाश है, सूर्य देव द्वारा प्रातःकाल जो दिया जाता है। साल भर हम सूरज को पूजते नहीं, उसके प्रकाश का सम्मान करते नहीं। अधिकांश लोग सूर्योदय के बाद उठ रहे हैं। यही सूर्य के प्रकाश का अपमान है। हम मुफ्त में मिल रही इस पूंजी को भी ठुकरा देते हैं और चार-पांच दीये इस रात जलाकर प्रकाश पूजने जैसा विचार करते हैं। दीये पूजे जाने चाहिए, लेकिन सूर्य का भी सम्मान किया जाए। तो इस बार दीपावली पर ‘ग्रोथ’ और ‘गिविंग’ दोनों एक साथ चलें, ऐसा भी एक दीया जलाएं। खूब धन अर्जित करें, लेकिन अधिक आय में से एक हिस्सा उन्हें जरूर दें, जिनको इसकी बहुत आवश्यकता है।



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