पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  मनुष्य को वैराग्य का भी अहंकार हो सकता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: मनुष्य को वैराग्य का भी अहंकार हो सकता है

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2 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

शिवपुराण के इन शब्दों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए- वैराग्य का भी अहंकार हो जाता है। भगवान शिव ने अर्धांगिनी पार्वती से तंत्र सूत्र नाम के विषय पर चर्चा करते हुए मनुष्य के अहंकार पर बहुत अच्छी टिप्पणी की है। ठीक बात है, पाने का तो अहंकार हो ही जाता है पर कोई व्यक्ति जब कुछ छोड़ता है तो उसका भी अहंकार हो जाता है कि हमने ऐसा त्यागा।

महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों में खूब भीड़ हुई। हमें समझना होगा कि एक भीड़ परमात्मा की होती है और दूसरी प्रचार की। कुम्भ में भी हमने देखा। एक धार्मिक आस्था का समूह था जो कुम्भ गया, लेकिन एक भीड़ कुम्भ के प्रचार की थी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन दिनों एक बहुत अच्छी बात बोली- सावधानी से संसाधनों का उपयोग करें।

आजकल बावले होकर लोग धर्म के पीछे पड़े हैं। धर्म को समझ नहीं पा रहे हैं। और दीवाने होकर तकनीक के पीछे पड़ गए हैं। इसलिए यह बात महत्वपूर्ण है कि जब भी संसाधनों का उपयोग करें चाहे वह धर्म के क्षेत्र में हो या भौतिक क्षेत्र में, सावधानी रखें। हमारी असावधानी की कीमत मनुष्यों का एक बहुत बड़ा भाग चुकाता है।

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