पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  चिंतन और विचार को चार जगहों पर ठीक से बांटें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: चिंतन और विचार को चार जगहों पर ठीक से बांटें

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3 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

बेचैनी से मनुष्य बहुत पहले से परेशान रहा है। और अब, एंग्जायटी उसके माथे पर चढ़कर नाच रही है। परीक्षाओं में, सम्बंधों के निर्वहन में, जॉब ढूंढने और बचाने में, खाने-पीने में- लम्बे समय से एंग्जायटी देखी जा रही है। लेकिन अब एक नई बेचैनी खासतौर पर प्रोफेशनल्स के जीवन में देखने को मिल रही है, और वह है एआई की एंग्जायटी।

इसको लेकर अधिकांश प्रोफेशनल्स बेचैन हैं। जिन्होंने अपनी जिंदगी टेक्नोलॉजी में लगा दी, अब उन्हें लग रहा है कि कंटेंट हो या कोडिंग, एआई मनुष्य के मस्तिष्क को पी जाएगा और हमने जो मेहनत की है, वो पानी में बह जाएगी।

ये ऐसा ही है कि दस साल कोई डॉक्टरी पढ़ता है और जब वह मरीज को पर्चा लिखता है तो मरीज पहले गूगल पर उस दवाई के बारे में पढ़ लेते हैं और फिर तय करते हैं कि खाएं या ना खाएं। तो आपने एक बटन दबाकर उसकी परीक्षा ले ली। ऐसे में अपने डेटा को सिक्योर करें। चिंतन और विचार चार जगह ठीक से बांटें- मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार में। तो शायद आप बेचैनी से बचेंगे।

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