पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अकेले हैं तो कुछ ऐसा कर जाएं कि खूब संतोष हो
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अकेले हैं तो कुछ ऐसा कर जाएं कि खूब संतोष हो

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55 मिनट पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

हजारों भक्त हैं, पर कोई एकाध भगवान को उपलब्ध होता है। वह जो अकेलेपन को एकांत में साध लेता है। भगवान को प्राप्त होने का अर्थ है, एक शांति, जीवन के प्रति तृप्ति मिल जाना। आजकल सिंगल लाइफ पर बहुत चर्चा होती है।

मुझे बहुत लोग मिलते हैं, जो कहते हैं हम सिंगल लाइफ जी रहे हैं। दो तरह की सिंगल लाइफ भारत में हैं। तलाकशुदा, विधवा, विधुर, ये भी सिंगल लाइफ हैं। दूसरे, बूढ़े माता-पिता, बच्चे दूर चले गए, एक छत के नीचे बहुत लोग रह रहे हैं लेकिन साथ नहीं हैं तो भी सिंगल लाइफ है। तो कोशिश करें कि अपने रोमांटिक पार्टनर खुद बन जाएं।

जब आप अकेलेपन को एकांत में बदलते हैं तो आपका सर्वश्रेष्ठ प्रकट होने लगता है। यदि आप सिंगल लाइफ जी रहे हैं तो बड़ा मकसद हाथ में ले लें। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों से सीखें। वो सिंगल लाइफ जीते हैं, लेकिन सबके साथ, सबके लिए जीते हैं इसीलिए उनका संतुष्टि का स्तर ऊंचा होता है। जीवन में लगे कि अकेले हैं तो कुछ ऐसा कर जाएं कि अपनी सिंगल लाइफ पर भी आपको खूब संतोष हो, प्रसन्नता हो, आनंद हो।

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