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भारतीय शादियों में सफेद रंग को लेकर सोच तेजी से बदल रही है। जो रंग लंबे समय तक शोक से जोड़ा जाता था, अब वही नई पीढ़ी की दुल्हनें अपनी शादी के बड़े फंक्शन्स के लिए चुन रही हैं। ट्रेंड सिर्फ रिसेप्शन तक सीमित नहीं है। अब फेरों और दूसरी धार्मिक रस्मों में भी सफेद और उसके अलग-अलग शेड्स दिख रहे हैं। भारत में परंपरागत तौर पर लाल रंग को शुभ शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक माना गया। हालांकि कुछ राज्यों में परंपरा अलग रही है। महाराष्ट्र में दुल्हनें हरा रंग पहनती रही हैं। केरल में सुनहरी बॉर्डर वाली सफेद साड़ी (कासावू) पहनने की पुरानी परंपरा है। अब इन क्षेत्रीय परंपराओं से आगे बढ़कर मिलेनियल्स और जेन-जी दुल्हनें पुराने ढर्रे को चुनौती दे रही हैं। आलिया-रणबीर और परिणीति-राघव ने भी अपनी शादियों में सफेद और आइवरी ड्रेसेस पहनकर आधुनिक फैशन का नया ट्रेंड सेट किया। जेन-एक्स से शुरू हुआ, जेन-जी ने आगे बढ़ाया शादियों में सफेद रंग का बढ़ता क्रेज असल में ‘जेन-एक्स’ पीढ़ी के ‘गाउन फंक्शन’ और रेड-कार्पेट फैशन की देन है। आज की आधुनिक दुल्हनें पुरानी रूढ़ियों को तोड़कर संगीत और फेरों जैसी मुख्य रस्मों में भी बेझिझक सफेद शेड्स चुन रही हैं। खासकर विदेशों से शिक्षित युवाओं में अपनी पसंद को लेकर अधिक स्पष्टता और आजादी दिख रही है, जिससे पारंपरिक लाल रंग के बजाय अब सफेद और न्यूट्रल रंगों का चलन बढ़ गया है। डिजाइनर श्वेता कपूर की शादी बनी उदाहरण डिजाइनर श्वेता कपूर के अनुसार, शादी में सफेद रंग आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने खुद अपनी शादी की ढोल नाइट और रिसेप्शन में सफेद शर्ट व मोतियों वाली सफेद साड़ी पहनकर पारंपरिक रंगों के बजाय आधुनिक और स्टाइलिश लुक को प्राथमिकता दी। पसंद के वेन्यू, आरामदेह कपड़ों का बढ़ा चलन स्टाइलिस्ट के अनुसार, अब शहरी जोड़े शादी के वेन्यू और फंक्शन जैसे फैसले खुद ले रहे हैं। दूल्हा-दुल्हन ऐसे आरामदायक व स्टाइलिश कपड़े को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिन्हें पहनकर वे पूरी रात आसानी से डांस और मस्ती कर सकें।
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