पीरियड्स की गड़बड़ी के साथ डायबिटीज-हार्ट डिजीज का खतरा:  70% महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उन्हें पीसीओएस की समस्या है
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पीरियड्स की गड़बड़ी के साथ डायबिटीज-हार्ट डिजीज का खतरा: 70% महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उन्हें पीसीओएस की समस्या है

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पीसीओएस, जिससे महिला जीवन भर जूझती है- टीनएज से लेकर मेनोपॉज तक। इसमें पीरियड्स साइकिल में गड़बड़ी, मुहांसे, अनचाहे बाल और गर्भधारण में दिक्कतें आती है। यह सिर्फ पीरियड्स से जुड़ी बीमारी नहीं है, बल्कि हॉर्मोन और मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करती है। जामा नेटवर्क की एक रिसर्च के मुताबिक दुनियाभर में हर 8 में से 1 महिला इससे प्रभावित होती है। WHO का अनुमान है कि PCOS से पीड़ित 70% महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उन्हें ये समस्या है। जानते हैं इस समस्या से जुड़े सभी जरूरी सवाल-जवाब पीसीओएस क्या है? यह एक हार्मोनल व मेटाबॉलिक समस्या है, जो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इसमें खासकर इंसुलिन सही से काम नहीं करता, जिस कारण ओवेरी में एग समय पर नहीं बनते या रिलीज नहीं होते और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। कुछ मामलों में ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बन सकते हैं। नया नाम पीएमओएस, क्यों? पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम PCOS नाम से यह सिर्फ ओवरी की समस्या लगती है। जबकि इससे मेटाबॉलिज्म व दिल भी प्रभावित होता है। इसलिए इसका नाम पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम PMOS रखने का प्रस्ताव दिया है, ताकि पूरे शरीर पर होने वाले इसके असर को समझा जा सके। इससे किन बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है? अगर लाइफस्टाइल सही न करें, तो टाइप-2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और एंडोमेट्रियल (गर्भाशय की लाइनिंग का कैंसर) का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर गर्भधारण, मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और बॉडी इमेज पर भी पड़ता है। इसके शुरुआती संकेत क्या हैं? इसके लक्षणों में अनियमित पीरियड्स, मुंहासे, अनचाहे बाल, हेयर फॉल, वजन बढ़ना व गर्भधारण में दिक्कत होना शामिल है। ऐसे लक्षण थायरॉइड, प्रोलैक्टिन हार्मोन की गड़बड़ी, एड्रिनल ग्रंथि के रोग या कुशिंग सिंड्रोम में भी दिख सकते हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह लें। किन्हें खतरा ज्यादा होता है? पीसीओेएस जेनेटिक और जीवनशैली दोनों कारणों से हो सकता है। परिवार में पीसीओएस, डायबिटीज या मोटापे का इतिहास होने पर जोखिम बढ़ता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर खतरा कम किया जा सकता है। कम एक्टिविटी, जंक फूड, खराब नींद और तनाव भी जोखिम कारक हैं। क्या पीसीओएस पूरी तरह ठीक हो सकता है? यह पूरी तरह ठीक नहीं होता, लेकिन सही इलाज, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और पर्याप्त नींद से इसे कंट्रोल कर सकते हैं। सिर्फ 10% वजन कम करने से हार्मोनल संतुलन व ओव्यूलेशन में सुधार होता है। हालांकि इसका इलाज जरूरत व लक्षणों के आधार पर तय होता है।



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