पुरानी गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट 10 गुना तक महंगा:  20 साल पुरानी कार की ₹15,000 और बाइक की ₹2,000 फीस लगेगी; देखें नई दरें
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पुरानी गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट 10 गुना तक महंगा: 20 साल पुरानी कार की ₹15,000 और बाइक की ₹2,000 फीस लगेगी; देखें नई दरें

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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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पुरानी गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट अब 10 गुना तक महंगा हो गया है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (MoRTH) ने देश में वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट टेस्ट की फीस बढ़ा दी है। ये बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (फिफ्थ अमेंडमेंट) के तहत लागू कर दिए गए हैं।

नए नियम के तहत अब 20 साल पुरानी कारों का फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने के लिए 15,000 रुपए, बाइक के लिए 2,000 रुपए और हैवी कमर्शियल व्हीकल के लिए 25,000 रुपए देने पड़ेंगे। इसके अलावा, गाड़ियों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट 10 साल में लेना होगा, जो पहले 15 पुरानी गाड़ियों के लिए अनिवार्य था।

अब 15 की जगह 10 साल में ही गाड़ी के लिए फिटनेस टेस्ट सर्टिफिकेट बनवाना होगा।

अब 15 की जगह 10 साल में ही गाड़ी के लिए फिटनेस टेस्ट सर्टिफिकेट बनवाना होगा।

फिटनेस के लिए अब उम्र के हिसाब से 3 कैटेगिरी

नई व्यवस्था में गाड़ियों को उम्र के हिसाब से 3 अलग-अलग कैटेगिरी में बांटा गया है। 10 से 15 साल, 15 से 20 साल और 20 साल से अधिक पुरानी गाड़ियां। यानी, जैसे-जैसे गाड़ी की उम्र बढ़ेगी, वैसे-वैसे फिटनेस टेस्ट का खर्च भी बढ़ेगा।

सबसे ज्यादा असर 20 साल से पुरानी कमर्शियल गाड़ियों पर पड़ा है, क्योंकि उन पर फीस 10 गुना तक बढ़ गई है। मंत्रालय का कहना है कि ये बदलाव पुरानी गाड़ियों की सेफ्टी और पर्यावरण स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए जरूरी थे।

फिटनेस टेस्ट की फीस क्यों बढ़ाई

मंत्रालय ने कहा है कि गाड़ियां अपनी डिजाइन लाइफ के बाद भी सड़क पर चलती रहती हैं, इसलिए उनका सही तरीके से टेस्ट होना चाहिए। नई फीस से ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर्स पर अच्छी सुविधाएं आएंगी और टेस्टिंग सख्त होगी।

भारत में गाड़ियां चलाने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट होना जरूरी है। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के व्हीकल ड्राइव करना अवैध है। कमर्शियल व्हीकल के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने का काम राज्य परिवहन विभाग करता है। फिटनेस सर्टिफिकेट से पता चलता है कि आपकी गाड़ी एमिशन स्टैंडर्ड के हिसाब से है।

पुराने वाहन मालिकों पर क्या असर पड़ेगा?

  • टेस्ट पर ज्यादा पैसे खर्च करना पड़ेगा। मिडिल क्लास फैमिली पर बोझ बढ़ेगा।
  • ट्रक-बस जैसे कमर्शियल वाहन मालिकों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
  • फीस बढ़ने से लोग जल्दी नई गाड़ी लेने को मजबूर हो जाएंगे।
  • सेफ्टी तो बढ़ेगी, पर मेंटेनेंस महंगा होने से गाड़ी स्क्रैप या सेकंड हैंड मार्केट में बेचना पड़ेगा।
  • फिटनेस टेस्ट में फेल होने पर री-टेस्ट की फीस भी बढ़ी है, परेशानी दोगुनी।
  • अंत में EV और BS-6 गाड़ियों को ही फायदा होगा।

स्क्रैपिंग पॉलिसी को बढ़ावा मिलेगा

  • सरकार का टारगेट 2030 तक सड़कों पर ज्यादातर क्लीन वाहन लाना है, फीस बढ़ोतरी उसी का हिस्सा है।
  • पुरानी गाड़ियों को चेक कराने के लिए अगले कुछ महीनों में RTO टेस्ट सेंटर्स पर भारी भीड़ हो सकती है।
  • MoRTH स्क्रैपिंग पॉलिसी को और मजबूत कर सकता है, पुरानी गाड़ी देकर नई पर डिस्काउंट मिलेगा।
  • वाहन मालिकों को सलाह, अभी से गाड़ी को रेगुलर मेंटेनेंस शुरू कर दो, टेस्ट आसानी से पास हो जाएगा।

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