बच्चों में बढ़ रहा स्क्रीन टाइम, गंभीर समस्याओं की वजह:  रिसर्च के अनुसार- मोबाइल, टैबलेट 9-30 माह के बच्चों के विकास में बाधक
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बच्चों में बढ़ रहा स्क्रीन टाइम, गंभीर समस्याओं की वजह: रिसर्च के अनुसार- मोबाइल, टैबलेट 9-30 माह के बच्चों के विकास में बाधक

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कई माता-पिता के लिए किसी चिड़चिड़े शिशु या छोटे बच्चे को फोन या टैबलेट देना उन्हें शांत करने का आसान उपाय लगता है। लेकिन अमेरिका की यूसी इरविन यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में पाया गया कि इससे बच्चों में सेल्फ कंट्रोल पर बुरा असर पड़ सकता है। इरविन सहित छह विश्वविद्यालयों के विद्वानों की एक टीम ने 210 परिवारों में बच्चों के 9 माह से 30 माह के होने तक स्टडी की। शोध प्रमुख स्टेफनी एम. रीच के अनुसार, ‘बच्चों में मोबाइल और टैबलेट का बार-बार इस्तेमाल आगे चलकर व्यवहार संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।’ जब बच्चे परेशान होते हैं, तो उन्हें शांत करना, उनसे बातचीत करना और संवाद करने के बजाय उन्हें स्क्रीन में उलझा दिया जाता है। शोधकर्ता इसे ‘विस्थापन’ (डिस्प्लेसमेंट) कहते हैं। इससे आगे बड़ी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम के साइड इफेक्ट्स
– भावनात्मक समस्याएं
– ध्यान में कमी
– पढ़ाई में पिछड़ना
– नींद में व्यवधान
– हिंसा के प्रति संवेदना में कमी
– मोटापा
– आंखों पर जोर
(स्रोत- मणिपाल हॉस्पिटल्स) रील्स, फास्ट-फॉरवर्ड की लत बच्चों का धैर्य छीन रही जालंधर की थेरेपिस्ट डॉ. निष्ठा पुरी के मुताबिक मोबाइल, रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने वाले बच्चों में ध्यान की कमी, चिड़चिड़ापन, बातचीत से बचना और पढ़ाई में रुचि कम होने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबी वीडियो को फास्ट फॉरवर्ड करके देखने की आदत उनके व्यवहार का हिस्सा बन रही है। यही वजह है कि जब उन्हें किसी की बात पूरी सुननी पड़ती है, तो वे जल्दी बोर हो जाते हैं। 5 साल से छोटे बच्चे रोज 2.2 घंटे स्क्रीन पर बिता रहे एम्स रायपुर के आशीष खोबरागड़े और एम. स्वाति शेनॉय ने 2,857 बच्चों पर किए गए 10 अध्ययनों का मेटा-विश्लेषण किया। क्यूरियस नामक पत्रिका में प्रकाशित उनकी स्टडी के मुताबिक 0–5 साल के बच्चे रोजाना औसतन 2.22 घंटे स्क्रीन सामने बिताते हैं, जो सुरक्षित सीमा (1.2 घंटे) से दोगुना है। मणिपाल हॉस्पिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों में भाषा संबंधी विकास धीमा होना, कॉग्नेटिव फंक्शनिंग में कमी, सामाजिक कौशल में कमी के साथ मोटापा, नींद में गड़बड़ी, एकाग्रता संबंधी समस्याएं बढ़ रही है। माता-पिता के लिए स्क्रीन टाइम मैनेज करने के सुझाव – उम्र और जरूरतों के आधार पर बच्चों का स्क्रीन-टाइम तय करें।
– सकारात्मक उदाहरण के लिए खुद भी स्क्रीन का उपयोग सीमित करें।
– बच्चों के साथ बैठकर बातचीत करें, ऑफलाइन समय बिताने पर जोर दें।



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